Satire

योर सिक्स, माई नाईन – व्यंग्य

जब सिक्स नाईन बन जाए—एआई, एडमिशन और ब्रांडेड शिक्षा पर करारा कटाक्ष।

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यूँ ही बेसबब ना फिरा करो

बशीर बद्र “परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता,किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता’।और सचमुच अब…

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सैंया मेरे ऐबले

यह व्यंग्य एक आम भारतीय गृहस्थ जीवन की हल्की-फुल्की लेकिन सच्ची झलक पेश करता है, जहाँ सैंया जी की अतरंगी…

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सब चंगा सी (व्यंग्य)

हाल के दिनों में क्रिकेट की दुनिया ने काफ़ी उथल-पुथल देखी। अब क्रिकेट में सिर्फ़ एक ही चीज़ स्थायी है—भारत…

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खुश तो बड़े होंगे तुम

बरसात, व्यवस्था और रोज़मर्रा की विडंबनाओं पर डॉक्टर–साले के संवाद में बुना तीखा व्यंग्य।

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“सैयारा का तैयारा” (व्यंग्य)

आधुनिक रिश्तों की उलझनों को लेखक ने बड़े ही विनोदी ढंग से पेश किया है।

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(व्यंग्य) – जरा हटके, जरा बचके

मुंबई सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक अनुभव है। लोकल ट्रेन से वड़ा पाव तक, अंधेरी की रौनक से BEST…

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व्यंग्य – गांव का टशन

“कुछ तो तेरे मौसम ही मुझे रास कम आये , और कुछ मेरी मिट्टी में  बगावत भी बहुत थी ”…

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व्यंग्य – इश्तहार-ए-इश्क

मशहूर शायर जनाब निदा फाजली साहब का एक शेर है-“कोशिश भी कर, उम्मीद भी रख, रास्ता भी चुन,फिर इसके बाद…

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व्यंग्य – ससुराल गेंदा फूल

कलजुग की तीसरी नियामत ससुराल मानी गई थी। स्त्री-पुरूष के लिये ससुराल के अलग -अलग मायने हैं ।

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