व्हाट्सअप के अनंत फॉरवर्ड, उधार के ज्ञान और ब्लू टिक की माया पर दिलीप कुमार का चुटीला और मजेदार व्यंग्य।
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जब सिक्स नाईन बन जाए—एआई, एडमिशन और ब्रांडेड शिक्षा पर करारा कटाक्ष।
Read More »बशीर बद्र “परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता,किसी भी आइने में देर तक चेहरा नहीं रहता’।और सचमुच अब…
Read More »यह व्यंग्य एक आम भारतीय गृहस्थ जीवन की हल्की-फुल्की लेकिन सच्ची झलक पेश करता है, जहाँ सैंया जी की अतरंगी…
Read More »हाल के दिनों में क्रिकेट की दुनिया ने काफ़ी उथल-पुथल देखी। अब क्रिकेट में सिर्फ़ एक ही चीज़ स्थायी है—भारत…
Read More »बरसात, व्यवस्था और रोज़मर्रा की विडंबनाओं पर डॉक्टर–साले के संवाद में बुना तीखा व्यंग्य।
Read More »आधुनिक रिश्तों की उलझनों को लेखक ने बड़े ही विनोदी ढंग से पेश किया है।
Read More »मुंबई सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि एक अनुभव है। लोकल ट्रेन से वड़ा पाव तक, अंधेरी की रौनक से BEST…
Read More »“कुछ तो तेरे मौसम ही मुझे रास कम आये , और कुछ मेरी मिट्टी में बगावत भी बहुत थी ”…
Read More »मशहूर शायर जनाब निदा फाजली साहब का एक शेर है-“कोशिश भी कर, उम्मीद भी रख, रास्ता भी चुन,फिर इसके बाद…
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