मशहूर शायर जनाब निदा फाजली साहब का एक शेर है-“कोशिश भी कर, उम्मीद भी रख, रास्ता भी चुन,फिर इसके बाद…
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कलजुग की तीसरी नियामत ससुराल मानी गई थी। स्त्री-पुरूष के लिये ससुराल के अलग -अलग मायने हैं ।
Read More »“ख्वाबों, बागों, और नवाबों के शहर लखनऊ में आपका स्वागत है” यही वो इश्तहार है जो उन लोगों ने देेखा…
Read More »तो देवियों और सज्जनों। मसला -ए-खास यह है कि हिंदी माध्यम से पढ़े विद्यार्थी को विज्ञान संकाय में साथ पढ़…
Read More »जो पहले चढ़ा, वो दरवाजे पर खड़ा रहेगा। अगर भीड़ में आपका बैग किसी को लगे, तो वो उसे अपनी…
Read More »इतना सस्ता प्याज चलते चलते इतना महंगा होने की गुत्थी कोई नहीं सुलझा पा रहा है
Read More »पागल हो क्या तुम ? मैं लड़के से शादी कर रही हूं ये क्या कम है । और क्या चाहिए…
Read More »खुराफाती तुम कवि कम और पक्के खुराफाती ज्यादा हो । इसीलिए उस शाही शादी में हर किसी को बुलाया गया…
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