General

काव्य एवं विज्ञान का संगमजयतु आदित्यम् जयतु चन्द्रयानम्

“जयतु आदित्यम् जयतु चन्द्रयानम्” डॉ. अम्बे कुमारी द्वारा लिखित सुंदर वैज्ञानिक काव्य-संग्रह है। इसमें चन्द्रयान-3 और आदित्य एल-1 की विजयगाथा को सरल हिन्दी में उकेरा गया है। चन्द्रयान-3 और आदित्य एल-1 की संरचनाओं पर भी सुंदर कविताएँ हैं—

“प्रोपल्शन मॉड्यूल था इसका
दो हजार एक सौ अड़तालीस किलोग्राम का
लैंडर मॉड्यूल विक्रम और प्रज्ञान रोवर सहित
सत्रह सौ बावन किलोग्राम का।”

अत्यंत सरल राजभाषा हिन्दी में काव्य रूप में कठिन वैज्ञानिक तथ्यों की प्रस्तुति करने में अम्बे कुमारी को महारथ हासिल है, जिसे उन्होंने इस पुस्तक में पूर्णतया दर्शाया है। काव्य के माध्यम से कठिन वैज्ञानिक तथ्यों की प्रस्तुति करने में यह पुस्तक बेजोड़ है।

चन्द्रयान-3 और आदित्य एल-1 मिशन इसरो का एक महत्वपूर्ण मिशन है। इसके लक्ष्यों को भी अम्बे कुमारी ने अपनी कविता में बखूबी उकेरने का प्रयास किया है—

“एक सूर्य का अध्ययन करेगा
एक चाँद की खोज करेगा
चाँद-सूरज की थाह पाएगा
यह मिशन पुरजोर।”

केवल चन्द्रयान-3 और आदित्य एल-1 ही नहीं, अपितु इस मिशन से जुड़े समस्त वैज्ञानिक समुदाय के जीवन एवं उपलब्धियों को भी इस पुस्तक में बखूबी दर्शाया गया है।
पी. वीरमुथुवेल, एम. शंकरन, उन्नीकृष्णन नायर, एम. श्रीकांत, एस. सोमनाथ, एन. वलारमथी, मीनल रोहित, निगार शाजी, मौमिता दत्ता, नंदिनी हरिनाथ, टेस्सी थॉमस जैसे वैज्ञानिकों के जीवन एवं उपलब्धियों की गौरव गाथा इस पुस्तक में गाई गई है।

केवल विज्ञान जगत में ही नहीं, अपितु सभी कक्षा के विद्यार्थियों के लिए यह अत्यंत उपयोगी है। मैं इसकी एक बानगी प्रस्तुत करता हूँ—

“केरल के अलप्पुझा प्रांत में
इस अग्निपुत्री का जन्म हुआ
मदर टेरेसा के नाम पर माता-पिता ने
टेस्सी थॉमस नाम दिया।”

वेदों में उल्लिखित चन्द्र एवं सूर्य पर जो शोध हैं, उन्हें भी सुश्री अम्बे कुमारी ने अपनी कविताओं के माध्यम से व्यक्त किया है। वेदों में निहित विज्ञान आज के विज्ञान के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहा है और वैज्ञानिक इससे लाभान्वित हो रहे हैं—

“चन्द्रमा की गति का भी
ऋग्वेद उल्लेख करता है
चन्द्रमा अमावस्या में सूर्य में प्रवेश करता है
पुनः सूर्य से प्रकट होता है।”

केवल हिन्दी ही नहीं, अपितु संस्कृत और भोजपुरी भाषा में भी इस काव्य-संग्रह में कविताएँ हैं, जो पाठकों का मन मोह लेती हैं। संस्कृत का एक उदाहरण पठनीय है—

“ब्रह्माण्ड रहस्य शोधितं मनस्वी मन प्रदायकम्
नव-नव रहस्य उद्घाटकम्
जीवन सुमंगल प्रदायकम्
जयतु विज्ञानं जयतु मंगलम्।”

भोजपुरी भाषा में भी सरल वैज्ञानिक तथ्यों की प्रस्तुति अत्यंत आकर्षक है—

“प्रज्ञान रोवरवा भी साथे-साथे गइल
चुपके से उ लैंडरवा से निकल गइल
शिव-शक्ति के बिंदुआ बनल रे बटोहिया
चंदा मामा पर गइल विक्रम लैंडरवा।”

सरल हिन्दी के मध्य वैज्ञानिक शब्दावलियों का प्रयोग अत्यंत मनोहारी है एवं यह पढ़ने में रोचकता उत्पन्न करता है। ये कठिन शब्दावलियाँ सरल हिन्दी के मध्य अत्यंत कुशलता से गुम्फित हैं, जिससे काव्य-संग्रह बिल्कुल अटपटा नहीं लगता और विज्ञान की दुनिया से हठात परिचय कराता है—

“यह मिशन सूर्य की गतिशील प्रक्रियाओं की
व्यापक समझ को सक्षम करेगा
सौर भौतिकी और हेलियोफिजिक्स में
उत्कृष्ट समस्याओं का समाधान करेगा।”

ये कविताएँ सहज ही मन को बाँध रखने में सक्षम हैं, जो अपनी राजभाषा में विज्ञान की सर्वोच्च उपलब्धियों को साधारण जनमानस तक ले जाती हैं। विज्ञान को जिस तरह काव्य-गंगा में प्रवाहित किया गया है, उससे विज्ञान भी सरल एवं रोचक हो उठा है।

डॉ. अम्बे कुमारी इस हेतु शुभकामना की पात्र हैं कि उन्होंने इसरो की इस महानतम उपलब्धि को सरल राजभाषा में प्रस्तुत किया है। मेरा हार्दिक आशीर्वाद है कि वे इसरो की अन्य उपलब्धियों को भी इसी तरह राजभाषा में उकेरेंगी, जो साधारण जनमानस एवं विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।


डॉ. अम्बे कुमारी
सहायक आचार्य, हिन्दी विभाग
मगध विश्वविद्यालय, बोधगया

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button