मोबाइल सिम ने खोला हत्याकांड का राज
(एल. बी. तिवारी)

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो में 10 साल तक काम करने के पश्चात वर्ष 2011 में मेरी पदस्थापना मोतिहारी जिला में हुई और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक द्वारा थानाध्यक्ष के रूप में सुगौली थाना में पदस्थापित किया गया।
थाना में पदस्थापना के दौरान वर्ष 2013 में एक ऐसी रहस्यमयी घटना घटित हुई, जिसने मुझे तथा वहाँ सुगौली बाजार के सभी लोगों को चौंका दिया था।
सुगौली बाजार में श्री रघुनाथ प्रसाद का एक पक्का मकान था। इस मकान में करीब चार कमरे तथा साथ में लगा हुआ आंगन था। आंगन से सटे उत्तर दिशा में एक छोटा दरवाजा था और मकान के प्रवेश द्वार पर बड़ा लोहे का दरवाजा था।
एक दिन थाना में सूचना प्राप्त हुई कि श्री रघुनाथ प्रसाद के सुगौली बाजार स्थित मकान में उनके मंझले पुत्र की हत्या हो गई है।
बंद कमरा और रहस्यमयी हत्या
जब मैं थाना के पुलिसकर्मियों के साथ घटनास्थल पर निरीक्षण हेतु पहुँचा तो निरीक्षण के दौरान पाया कि मकान के दोनों प्रवेश द्वार अंदर से बंद थे। वहीं मकान के एक कमरे में मृतक के छोटे भाई और उसकी पत्नी रात में सोए हुए थे तथा दूसरे कमरे में पलंग पर मृतक का शव पाया गया था। पलंग का बिस्तर अस्त-व्यस्त अवस्था में था।
मृतक के शव निरीक्षण से उसके शरीर पर कोई बाहरी जख्म नहीं पाया गया। चूँकि मकान के दोनों प्रवेश द्वार पर किसी प्रकार की तोड़-फोड़ परिलक्षित नहीं हो रही थी, इसलिए पुलिस सहित सभी स्थानीय लोगों के मन में यह स्वाभाविक प्रश्न बार-बार उठ रहा था कि आखिर अपराधी जब दरवाजा तोड़कर या खोलकर नहीं आया, तो इस प्रकार का जघन्य अपराध कैसे घटित हुआ?
इस रहस्य के कारण किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। बार-बार दूसरे कमरे में सोए हुए मृतक के छोटे भाई तथा उसकी पत्नी पर संदेह गहराता जा रहा था।
शक की सुई परिवार पर
स्थानीय लोग दबे जुबान में तथा मेरे कानों में बार-बार यह तर्क रख रहे थे कि जब दोनों प्रवेश द्वार बंद हैं, तो जरूर मृतक के छोटे भाई और उसकी पत्नी ने मिलकर ही इस घटना को अंजाम दिया है।
प्रथम दृष्टया यह तर्क और शक गलत भी नहीं था। बाजार के प्रभावशाली लोग यह राय बना चुके थे कि यह अपराध मृतक के छोटे भाई एवं उसकी पत्नी द्वारा किया गया है। अतः पुलिस को तत्काल इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज देना चाहिए।
मेरे द्वारा ऐसा करने से इंकार किए जाने पर लोग राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने की योजना बनाने लगे। मैंने मृतक के पिता रघुनाथ प्रसाद को विश्वास में लिया। भारी दबाव के बावजूद मृतक के भाई को गिरफ्तार नहीं किया गया और यह निश्चय किया गया कि इस कांड का सही उद्भेदन किया जाएगा।
सात दिन बाद मिला सुराग
प्रारंभिक काल में कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। अतः घटना के सात दिन पश्चात मैं पुनः घटनास्थल पर गया और मृतक के कमरे का सूक्ष्म निरीक्षण करने लगा।
इसी दौरान मृतक जिस पलंग पर मृत पाया गया था, उस पलंग के दक्षिणी पाए के नीचे एक मोबाइल का थोड़ा मुड़ा हुआ सिम कार्ड पाया गया।
उस सिम को जब्त किया गया तथा पुलिस अधीक्षक कार्यालय भेजकर यह जांच की गई कि वह सिम किस मोबाइल में प्रयोग किया गया था।
जांच के दौरान पता चला कि यह सिम एक अपराधी के मोबाइल में प्रयुक्त हुआ है और घटना की रात उसका टावर लोकेशन रक्सौल में रेलवे गुमटी के पास पाया गया था।
सिम कार्ड से अपराधी तक
इस तरह उस संदिग्ध अपराधी की तलाश की जाने लगी। अनुसंधान के दौरान पता चला कि वह संदिग्ध अपराधी मोतिहारी जिला के पलनवा थाना का रहने वाला है।
अनुसंधान के दौरान ही स्थानीय थाना के सहयोग से उस अपराधी को पकड़ लिया गया और पकड़कर उसे सुगौली थाना लाया गया।
सुगौली थाना में लाकर कड़ी पूछताछ के बाद उसने अपना अपराध स्वीकार किया और बताया कि इस अपराध में कुल छह अपराधी शामिल थे।
कैसे हुई हत्या?
उससे पूछे जाने पर कि बंद मकान में प्रवेश कैसे हुआ, उसने बताया कि मृतक मधुमेह का रोगी था और रात में लगभग 10 बजे खाना खाने के बाद प्रतिदिन टहलने के लिए निकला करता था।
मृतक तथा उसके घर की चार-पाँच दिनों से रेकी की जा रही थी।
घटना के दिन जब मृतक टहलने के लिए घर से निकला तो घर के खुले दरवाजे से सभी छह अपराधी मकान के अंदर प्रवेश कर गए और मकान के अंदर ही छिप गए।
जब मृतक टहलकर वापस आया तो उसने आंगन से सटे छोटे दरवाजे से प्रवेश कर दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।
रात हो जाने पर जब मृतक तथा मृतक के छोटे भाई तथा उनकी पत्नी अपने-अपने कमरे में सो गए, तब सभी छह अपराधियों ने मृतक पर जानलेवा हमला किया।
मृतक ने भरपूर प्रतिरोध किया। इसी दौरान एक साथी ने उसकी बनियान को फाड़कर उसके मुँह में ठूँस दिया और तब तक ठूँसा रहा जब तक कि दम घुटने से उसकी मृत्यु नहीं हो गई।
यहीं से खुला राज
गुत्थम-गुत्थी के दौरान ही एक साथी का मोबाइल जमीन पर गिर गया और गिरकर खुल गया। उसी दौरान उस मोबाइल का सिम कार्ड वहीं गिर गया, जिसे अपराधी ले जाना भूल गए थे।
घटना के बाद हमलावर आंगन की दीवार फाँदकर बाहर निकल गए।
इस अपराधी की निशानदेही पर ही अन्य पाँच अपराधियों को गिरफ्तार कर न्यायालय भेजा गया।
अनुसंधान के दौरान पता चला कि मृतक का बड़ा भाई, जो गाँव में रहता था, बेरोजगार था। घर के लोग भी उस पर तंज कसते थे। इसी बात से उत्तेजित होकर उसने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था।
इस घटना से मिली सीख
इस कांड का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह था कि अपराधी घटनास्थल पर ही कोई न कोई ऐसा सबूत अनजाने छोड़ जाता है, जिससे अपराधियों तक पहुँचने में सहायता मिलती है।
अतः घटना स्थल का बार-बार सूक्ष्म निरीक्षण करना अनुसंधानकर्ता का पहला दायित्व है।

लेखक परिचय
ललित विजय तिवारी
पुलिस निरीक्षक
विशेष निगरानी इकाई
बिहार, पटना




