सब चंगा सी (व्यंग्य)
हाल के दिनों में क्रिकेट की दुनिया ने काफ़ी उथल-पुथल देखी। अब क्रिकेट में सिर्फ़ एक ही चीज़ स्थायी है—भारत और पाकिस्तान के मुकाबले में पाकिस्तान की हार। भले ही मैच किसी भी फ़ॉर्मेट और किसी भी पिच पर खेला गया हो।
इस स्थायी सत्य के अलावा क्रिकेट के अनिश्चितताओं भरे इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि टूर्नामेंट जीतने वाली टीम बिना ट्रॉफी के लौटी और फ़ाइनल हारने वाली टीम का बंदा ट्रॉफी दबाए बैठा रहा।

क्रिकेट के एशिया कप में ऐसा ही हुआ, जहाँ टीम इंडिया ने ट्रॉफी जीती, लेकिन एशिया कप पाकिस्तान के गृहमंत्री और एशियन क्रिकेट काउंसिल के चेयरमैन मोहसिन नक़वी दबाए बैठे हैं। इस अनूठी घटना के अलावा इस बरस भारत में क्रिकेट प्रेमियों ने भी खूब दिलचस्प नज़ारे देखे।
जैसे कि आईपीएल की सबसे चर्चित टीम आरसीबी (रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर) ने अठारह सालों के लंबे इंतज़ार के बाद आईपीएल की ट्रॉफी जीत ली। आरसीबी के फ़ैन क्रिकेट की दुनिया में सबसे वफ़ादार माने जाते रहे हैं। यहाँ तक कि आरसीबी के फ़ैन्स को अब इंग्लैंड के मशहूर क्रिकेट फ़ैन समूह बार्मी आर्मी से भी ज़्यादा लॉयल माना जाता है।
अठारह साल का इंतज़ार कम नहीं होता। क़ानूनी तौर पर अठारह साल की उम्र के बाद इंसान बालिग हो जाता है और माना जाता है कि एक पीढ़ी बदल गई। पर नहीं बदला तो आरसीबी के फ़ैन्स का भरोसा—कि आरसीबी एक न एक दिन आईपीएल ट्रॉफी ज़रूर जीतेगी और इसे विराट कोहली जितवाएँगे।
कुछ ऐसे ही आरसीबी के जबरा फ़ैन ठहरे हंसमुख बरार। हंसमुख पंजाब में रहने वाला एक एक्स-क्रिकेटर था और आरसीबी तथा विराट कोहली का ज़बरदस्त फ़ैन था। वह एक दिलेर पंजाबी था। हालाँकि इस बरस आईपीएल के फ़ाइनल में किंग्स इलेवन पंजाब को आरसीबी ने ही हराया था। हंसमुख को पंजाब के हारने का दुख तो था, मगर विराट और आरसीबी के जीतने की ख़ुशी उसे दुगुनी थी।
हंसमुख ने अपनी युवावस्था में क़सम खाई थी कि जब तक आरसीबी कप नहीं जीत लेती, तब तक वह विवाह नहीं करेगा। इस चक्कर में बरस पर बरस बीत गए। उसके घर आने वाले रिश्ते बरस-दर-बरस कम होते गए।
बस स्कूल के दिनों से उसे पसंद करने वाली कली कौर थी, जो अब तक अविवाहित थी। कली कौर भी एक्स-क्रिकेटर थी, लेकिन अब अपनी बेकरी चलाती थी। कभी कली कौर और हंसमुख बरार बचपन में एक साथ क्रिकेट खेला करते थे। दोनों ही इंडिया लेवल तक खेलना चाहते थे, मगर तक़दीर का लेखा कुछ और ही था।

कली कौर ने भी अब तक शादी नहीं की थी, क्योंकि उसके घरवाले उसका विवाह कनाडा में करना चाहते थे और वह इंडिया में रहकर क्रिकेटर बनना चाहती थी। हंसमुख और कली—दोनों ही कामयाब प्रोफ़ेशनल क्रिकेटर नहीं बन सके। अपनी-अपनी कामयाबी का पीछा करते हुए दोनों ने अपना घर नहीं बसाया। दोनों चालीस की दहलीज़ पर थे और दोनों को ही विवाह प्रस्ताव आने बंद हो गए थे।
मगर दोनों में एक फ़र्क़ था। जहाँ हंसमुख आरसीबी को ट्रॉफी जीतते देखना चाहता था, वहीं कली कौर आरसीबी की टीम से खेलकर उसे जितवाना चाहती थी। मगर दोनों की चाह पूरी न हो सकी। कविवर नीरज के शब्दों में—
“चाह तो निकल सकी ना,
हाय उम्र ढल गई।”
नतीजतन अब दोनों क्रिकेट प्रेमी बनकर रह गए हैं। कली कौर साहिबा बेकरी चलाती हैं और हंसमुख कौर साहब हँस-हँसकर टैक्सियों को चलवाने का बिज़नेस करते हैं।
दो बरस पहले जब आरसीबी की महिला टीम ने आईपीएल जीत लिया, तो लोगों ने हंसमुख से कहा—अब तो शादी कर लो, क्योंकि तुम्हारी ज़िद आरसीबी के जीतने की थी। पुरुष या महिला टीम का भेद तो तुमने क़सम खाते वक़्त किया ही नहीं था।
मगर हंसमुख ठहरा एकदम लॉयल और पक्का आरसीबी फ़ैन। उसने अपनी भीष्म प्रतिज्ञा दोहराई—
“आईपीएल के पहले सीज़न में जब मैंने आरसीबी के ट्रॉफी जीतने को लेकर क़सम खाई थी, तब वीमेन आईपीएल होता ही नहीं था। सो क़सम से कोई भी कम्प्रोमाइज़ नहीं। जब विराट कोहली की आरसीबी जीतेगी, तभी क़सम पूरी होगी।”
और इस साल विराट कोहली की आरसीबी ने आईपीएल की ट्रॉफी जीत ली।
जैसे ही आरसीबी ने ट्रॉफी जीती, वैसे ही हंसमुख को अपनी शादी की फ़िक्र होने लगी। चालीस की उम्र के बाद शादी इतनी आसान नहीं होती। रिश्ते तो आने से रहे, तो हंसमुख को अपने बचपन का प्यार याद आया।
उसने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो अपलोड किया और एक्स-क्रिकेटर व अपनी पुरानी दोस्त कली कौर को टैग करते हुए प्रपोज़ किया—
“कली, तुम तो मुझे बचपन से जानती हो। यह भी जानती हो कि मैं चालीस की उम्र पार कर चुका हूँ। मेरे दिल की पिच में सिर्फ़ क्रिकेट था। अब दिल की पिच पर क्रिकेट के बाद पैवेलियन में जो थोड़ी-सी जगह बची है, उसमें मैं तुम्हें स्पेस देना चाहता हूँ।
बाक़ी लड़के टक्सीडो पहनते हैं, गुलाब लेकर आते हैं, घुटनों पर बैठते हैं और रोमांटिक गानों के बीच कहते हैं—‘Will you marry me?’
लेकिन मैं ठहरा आरसीबी का लॉयल फ़ैन और विराट कोहली का अंध-भक्त।
मैंने विराट कोहली से सीखा है—गेम में नो शॉर्ट-कट। चाहे जीत हो या हार, अंतिम गेंद तक न मैदान छोड़ना है, न उम्मीद।
तो आज इस ज़िंदगी के मैदान में बड़ी उम्मीद से, अपनी आरसीबी वाली जर्सी में, मैं तुमसे अपने दिल की बात कहता हूँ।
जैसे अठारह साल से आरसीबी को आईपीएल ट्रॉफी की तलाश थी, वैसे ही आरसीबी के कप जीतने पर ही मुझे मैरिज करनी थी। अब जब विराट कोहली की आरसीबी ट्रॉफी जीत चुकी है, तो मुझे अपनी ज़िंदगी की पिच तैयार करनी है।
मुझे तुम्हें देखकर उतनी ही ख़ुशी मिलती है, जितनी विराट कोहली को सेंचुरी मारते देखने पर मिलती है।
तुम्हें देखकर दिल करता है कि यह वक़्त नो-बॉल हो जाए और यह लम्हा लौट-लौटकर आए।
तुम मेरी ज़िंदगी की वह सुपर ओवर हो, जो कितना भी छोटा क्यों न हो, मगर उसमें पूरी ज़िंदगी समा जाती है।
तुम्हारी स्माइल मुझ पर ऑस्ट्रेलिया की पेस बैटरी की तिकड़ी जैसी बिजली गिराती है—ख़तरनाक भी, शानदार भी।
तुम्हारे साथ वक़्त बिताना एबी डी विलियर्स की 360 डिग्री बैटिंग देखने जैसा है—हर बॉल पर नई उम्मीद, हर पल में नई ख़ुशी।
दिल करता है कि तुम्हारी मुस्कराहट मैदान के चारों ओर फैल जाए और मैं नॉन-स्ट्राइकर एंड पर खड़ा होकर तुम्हें निहारता रहूँ।
ज़िंदगी में आरसीबी के 263 नॉट-आउट का सुख हो या 49 पर ऑल-आउट का दुख—
जैसे विराट कोहली ने आरसीबी के साथ हर सीज़न निभाया, वैसे ही मैं भी हर वक़्त तुम्हारे साथ कंसिस्टेंट रहूँगा।
और आख़िर में—जिस तरह आरसीबी के फ़ैन कहते हैं ‘ई साला कप नमदे’,
उसी तरह मैं तुमसे कहना चाहता हूँ—‘ई साला दुल्हन नमदे।’
Will you marry me?”
जितनी देर में क्रिकेट के मैच में उछाला गया टॉस का सिक्का नीचे आता है, उतनी ही देर में कली कौर का इंस्टाग्राम पर जवाब आ गया—
“सब चंगा सी।”
कली का इकरार सुनकर हंसमुख गुलाब-सा खिल उठा और फिर खिलखिलाकर हँस पड़ा।
समाप्त




