गुमनाम नायक – अमर गुलाब सिंह लोधी
तिरंगे की शान के लिए बलिदान
भारत माता को स्वतंत्र करने में अनगिनत वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति हँसते-हँसते दी थी। इन वीर स्वतंत्रता सेनानियों में कुछ नाम तो इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में मौजूद हैं लेकिन अफसोस की बात है कि बहुत से नायकों को भारतीय इतिहास में वो नाम और सम्मान नहीं मिला, जो उन्हें मिलना चाहिए। हमारी वर्तमान पीढ़ी इन गुमनाम नायकों और उनके द्वारा दिए गए योगदान के विषय में जानते ही नहीं है।
कैफे सोशल पत्रिका पिछले कई सालों से लगातार इन नायकों से परिचय करा रहा है ताकि वर्तमान पीढ़ी इनसे प्रेरित होकर अपने देश के लिए अपने स्तर पर अपना योगदान दे सकें।

इस बार हम एक ऐसे नायक से आपका परिचय करा रहे हैं, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के सामने झुकने की बजाय डटकर सामना करते हुए वीरगति को प्राप्त किया। वो नायक थे भारत माता के युवा वीर सपूत अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी जी।
आपका जन्म सन् 1903 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के ग्राम चंदिका खेड़ा में हुआ था। आपके पिता ठाकुर राम रतन सिंह लोधी एक साधारण किसान थे। किसान परिवार में जन्म लेने के कारण आपका बचपन सादगी भरा रहा। बचपन से ही आपमें साहस और आत्मविश्वास भरपूर था।
साधारण किसान परिवार से होने के कारण आपकी शिक्षा सामान्य रही। जब वह युवावस्था की दहलीज पर कदम रख रहे थे, तब देश में स्वतंत्रता आंदोलन, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और झंडा आंदोलन के कारण देश में चलते बहुत से लोग प्रभावित हुए और इन आंदोलनों से जुड़े। इसके चलते देश में भारत माता को स्वतंत्र कराने और अंग्रेजी हुकूमत को देश से बाहर करने का माहौल पैदा हो गया।
गुलाब सिंह लोधी जैसे अनेक युवाओं के मन में ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियाँ, अत्याचार, भारतीयों का अपमान एवं आर्थिक-सामाजिक शोषण से विद्रोह की भावना घर कर चुकी थी। आंदोलनों की पुकार एवं मातृभूमि की सेवा करने के लिए उन्हें सक्रिय रूप से स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

उस समय चल रहे विभिन्न आंदोलनों में झंडा सत्याग्रह आंदोलन एक महत्वपूर्ण आंदोलन बन गया था। क्योंकि इस समय अंग्रेजी सरकार भारतीयों को सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगा झंडा फहराने की अनुमति नहीं देती थी। ऐसा यदि कोई करता भी था तो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता था। चूँकि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सिर्फ तीन रंगों से बना हुआ कपड़ा मात्र नहीं था बल्कि भारतीयों के लिए स्वराज, स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया था। देश में हर जगह सत्याग्रहियों के समूह झंडा गीत गाते हुए आजादी के नारे लगाते थे…
विजयी विश्व तिरंगा प्यारा
झंडा ऊँचा रहे हमारा
इसकी शान न जाने पाए
चाहे जान भले ही जाए।।

झंडा आंदोलन में आपने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।
अगस्त 1935 में लखनऊ के अमीनाबाद पार्क में आपने अपने साथियों के साथ झंडा फहराने का एक कार्यक्रम करने का निश्चय किया। जब इसकी खबर अंग्रेजी सरकार तक पहुँची तो अंग्रेजी प्रशासन ने इस कार्यक्रम को न होने देने के लिए पार्क को चारों तरफ से घेरकर सशस्त्र सैनिक तैनात कर दिए। जब पार्क में आपके नेतृत्व में आस-पास के क्षेत्रों से लोग पहुँचे तो अंग्रेजी सरकार ने अपनी दमनकारी नीतियों एवं व्यवस्था के माध्यम से इन लोगों को रोकने का प्रयास किया।
चूँकि स्वतंत्रता सेनानियों का दृढ़ निश्चय और अडिग संकल्प था, इसलिए वो लगातार आगे अपने साथियों को साथ लेकर आगे बढ़ते रहे। इसी समय आपने अपने असाधारण साहस और चालाकी से सिपाहियों को चकमा देते हुए पार्क के अंदर घुस गए। उस समय उनके हाथ में बैलों को हाँकने वाला एक डंडा था, उसी डंडे में झंडा बाँधकर अपने कपड़ों में छिपा लिया।
पार्क के अंदर पहुँचकर आप एक पेड़ पर चढ़ गए और अवसर देखकर तिरंगा झंडा फहरा दिया। जब यह दृश्य वहाँ उपस्थित अन्य लोगों ने देखा तो वातावरण देशभक्ति से गूँज उठा।
गुलाब सिंह लोधी जी ने भी जोश और गर्व के साथ नारे लगाने शुरू कर दिए…
तिरंगे झंडे की जय, भारत माता की जय
गांधी जी की जय, इंकलाब जिंदाबाद
तिरंगे को लहराते देखा अंग्रेज अधिकारी तिलमिला उठे, उन्होंने सिपाहियों को गोली चलाने का आदेश दे दिया।
आदेश मिलते ही एक साथ अनेक बंदूकों से गोलियों की बौछार होने लगी। कई गोलियाँ आपके शरीर में जा लगीं और आप गंभीर रूप से घायल होकर पेड़ से नीचे गिर पड़े।

23 अगस्त 1935 को सिर्फ 32 वर्ष की आयु में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
अमीनाबाद पार्क उस समय स्वतंत्रता आंदोलन और सभाओं के लिए एक प्रमुख स्थान बन गया था। आज अमीनाबाद पार्क को झंडेवाला पार्क के नाम से जाना जाता है।
सरकार ने सन् 2004 में पार्क में आपके सम्मान में एक प्रतिमा स्थापित की। 23 दिसंबर 2013 को भारत सरकार ने आपके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया।
आज यह पार्क अमर शहीद युवा क्रांति वीर गुलाब सिंह लोधी जी के बलिदान का स्मारक है। पार्क में आने वाले हर भारतीय को उनके योगदान और स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाता है।
अमर शहीद युवा क्रांति वीर गुलाब सिंह लोधी भारत माता के सच्चे सपूत थे जिन्होंने बिना किसी निजी स्वार्थ के देश के लिए बलिदान दिया था।
कैफे सोशल पत्रिका भारत माता के इस वीर सपूत को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शत्-शत् नमन करता है।
भारत माता की जय।
तिरंगे झंडे की जय।

संपादक – मंडल
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