सकल पदारथ है जग माही ……..
कर्महीन नर पावत नाही।

डॉ. शेखर चन्द्र साहू
पीएच.डी. (प्रबंधन)
निदेशक, कुमारी ओशीन फाउंडेशन
यह समस्त संसार कर्म पर आधारित है। कर्मवीरों के बल पर ही यह संसार टिका हुआ है। यह दोहा रामचरितमानस ग्रंथ में गोस्वामी तुलसीदासजी ने कर्म और कर्मवीरों के महत्व को समझाने के लिए लिखा है।
अक्सर लोगों को आपने कहते हुए सुना होगा कि, “मेरा काम सफल नहीं हो रहा है”, “भाग्य साथ नहीं दे रहा है”, “इस संसार में मुझे कष्ट ही कष्ट मिल रहा है और दूसरे लोग आराम से हैं”, “उनको कम परिश्रम में अच्छी चीज मिल जाती है, उनका भाग्य साथ देता है, हमारा भाग्य क्यों साथ नहीं देता है?” आदि-आदि……

यहाँ पर एक तथ्य विचार करने योग्य है कि मनुष्य/व्यक्ति हमेशा दूसरों के द्वारा किये गये प्रयासों/कार्य/कर्म पर ध्यान नहीं देता है, सिर्फ उनके द्वारा प्राप्त फल पर ध्यान देता है। वास्तविकता यह है कि दूसरा व्यक्ति जो आज हमें सफल दिखाई देता है और जीवन में उच्च शिखर पर है, यश और मान-सम्मान प्राप्त कर रहा है, उसमें उनके भाग्य/लकी का कोई साथ नहीं होता है, बल्कि सब उनके कठोर परिश्रम, सतत प्रयास, असफल होने पर भी पूरे मन से कार्य करने के निर्णय का नतीजा/कर्मफल होता है।

कर्मशील व्यक्ति जानते हैं कि सतत प्रयास और कठोर परिश्रम कभी व्यर्थ नहीं जाते और देर-सबेर सफलता निश्चित है, इसलिए वो असफलता से घबराता नहीं है और प्रत्येक असफलता उन्हें और ज्यादा सफलता की ओर जाने के लिए उत्साहित करती है। इसलिए वो निश्चिंत रहते हैं कि सफलता तो उन्हें मिलनी ही है और वो थक-हारकर बैठ नहीं जाते, और न ही दूसरे की सफलताओं को उनका लक/भाग्य का नाम देते हैं।
ठीक उसी तरह जैसे प्रत्येक विशाल भवन के नीचे दबी हुई उस भवन की बुनियाद/नींव होती है, ठीक उसी तरह से ऊँचे शिखर पर बैठे हुए प्रत्येक सफल व्यक्तियों के पीछे उनके द्वारा किये गये कठोर परिश्रम और सतत प्रयास होते हैं। उन्हीं व्यक्तियों के ऊपर तुलसीदास की यह चौपाई सार्थक बैठती है।
“सकल पदारथ है जग माही,
कर्महीन नर पावत नाही।”**
इसी संसार में सारी खुशियाँ, सारी वस्तुएँ और सारा आनंद है, लेकिन कर्मविहीन मनुष्य और भाग्य से डरे हुए लोग इस संसार में कुछ प्राप्त नहीं कर पाते। सिर्फ सफल लोगों की ईर्ष्या कर सकते हैं, उन्हें बुरा-भला कह सकते हैं और इन्हीं सब व्यर्थ बातों में अपना समय खराब करते हैं।

“दैव-दैव आलसी पुकारा”
हमारे आसपास ऐसे लोग होते हैं जो लगातार मेहनत और धैर्य के साथ अपने लक्ष्य को पाने की कोशिश करते रहते हैं। शुरुआत में उन्हें कई बार असफलता और निराशा का सामना करना पड़ता है, लेकिन वे हार नहीं मानते और बार-बार प्रयास करते रहते हैं।
धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाती है और उन्हें सफलता मिलती है। तब उन्हें एहसास होता है कि अगर उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी प्रयास जारी नहीं रखा होता, तो वे आज यहाँ तक नहीं पहुँच पाते।
इसलिए जीवन में सफलता पाने के लिए मेहनत, धैर्य, निरंतर प्रयास और सही दिशा बहुत जरूरी है। यही आदतें व्यक्ति को धीरे-धीरे आगे बढ़ाती हैं और उसे अपने लक्ष्य तक पहुँचने में मदद करती हैं।
कठिन परिश्रम, सतत प्रयास, कर्म के प्रति लगनशीलता के द्वारा कोई भी व्यक्ति ऊँचे शिखर पर पहुँच जाता है। सफलता प्राप्त करने के लिए नकारात्मक सोच को हटाकर सकारात्मक सोच के साथ सतत प्रयास करने पर संसार की सभी वस्तुएँ प्राप्त हो सकती हैं, क्योंकि सभी प्रकार की वस्तुएँ इसी संसार में हैं, जो कर्मशील व्यक्तियों को प्राप्त होती हैं, कर्महीन व्यक्ति उन्हें कभी प्राप्त नहीं कर सकता।

समापन
उपरोक्त दोहे का मतलब है कि इस संसार में सभी प्रकार की वस्तुएँ उपलब्ध हैं, लेकिन एक आलसी और कर्महीन व्यक्ति कुछ भी नहीं प्राप्त कर सकता है।
आप सभी अच्छी संभावनाओं का पता लगाएँ ताकि आप अधिकतम सफलता और समृद्धि का आनंद उठा सकें। जो कर्म नहीं करते हैं, वो इन सब वस्तुओं को कभी प्राप्त नहीं कर सकते हैं। परिश्रम और उद्योग से ही इस संसार में सुख, संपत्ति, यश की प्राप्ति होती है।




