हिंदी साहित्य
- नीव के पत्थर

नींव के पत्थर – एम्बुलेंस ड्राईवर (चालक)
“रफ्तार नहीं, ज़िम्मेदारी हूं मैं” एम्बुलेंस चालक बसंत मिश्रा, भिण्ड (म.प्र.) की कहानी सड़कों पर जब सायरन बजाती हुई एम्बुलेंस…
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नींव के पत्थर: कब्रिस्तान का मौन रक्षक
जब ठंडी हवाएँ चलती हैं और शहर की सारी रोशनी मंद हो जाती हैं, तब एक व्यक्ति की उपस्थिति अंधेरे…
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व्यंग्य – ससुराल गेंदा फूल
कलजुग की तीसरी नियामत ससुराल मानी गई थी। स्त्री-पुरूष के लिये ससुराल के अलग -अलग मायने हैं ।
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गुमनाम नायक – श्री पोट्टि श्रीरामुलु
लेकिन लंबी प्रतीक्षा के बाद भी यह मांग पूरी नहीं होने पर आपने पुनः १९ अक्टूबर १९५२ को महर्षि सम्बमूर्ति…
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कहानी -सैलाब, अनिता रश्मि की कहानी
आधी रात को काले गरजते बादलों ने अपना विकराल रूप दिखला दिया। पहले चांद को ढंका। फिर फट पड़े।धारसार बारिश...।…
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- मेरी कलम से

नव वर्ष के संकल्प
वक्त का पहिया निरंतर चल रहा हैआज जो है वो कल बदल रहा हैवक्त का हमराज बनकर जो चला हैवह…
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मैं खुश हूं कि नहीं
मैं खुश हूं कि नहींतुम इस बात की परवाह मत करना पापा!अब अगर ख़ामोश हो भी जाऊं,तो हर बार की…
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इलेक्ट्रीशियन – हर घर का अनदेखा नायक
सब कुछ 24x7 चलते हैं। लेकिन इस चकाचौंध के बीच कई लोग ऐसे भी हैं, जो दिन-रात मेहनत करके अपने…
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२०२५ और आप
हर वर्ष की तरह 2025 विभिन्न राशियों के लिए कैसा बीतेगा? यह कैफे सोशल आपको बता रहा है । मेष…
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