नीव के पत्थर

सफाईकर्मी – स्वच्छता के अनदेखे नायक

Dr. Vijay Garg
Retired Principal | Educational Columnist | Eminent Scientist
Street Kour Chand, MHR
Malout, Punjab

सुबह का शहर अभी पूरी तरह जागा भी नहीं होता। लोग अपने घरों में चाय पी रहे होते हैं, बच्चे स्कूल जाने की तैयारी कर रहे होते हैं और बाजार धीरे-धीरे खुल रहे होते हैं। उसी समय राम लाल अपने काम पर निकल चुका होता है।

राम लाल का काम इस तरह का है कि शहर के अधिकांश लोग देखना भी नहीं चाहते। वह सीवरेज की सफाई करता है। जब कहीं सीवर जाम हो जाता, गंदा पानी सड़क पर फैलने लगता या नाली का प्रवाह रुक जाता, तो राम लाल जैसे सफाई सेवक को बुलाया जाता है। लोगों के लिए यह केवल एक समस्या होती है कि सीवर बंद है।

राम लाल के लिए यह उसकी रोजी-रोटी होती है और जोखिम भरा काम होता है।

वह जानता था कि सीवर के भीतर अंधेरा होता है, बदबू असहनीय होती है और जहरीली गैसों का खतरा बना रहता है। फिर भी राम लाल काम करता है, क्योंकि राम लाल के घर का चूल्हा उसकी मेहनत से ही जलता है। राम लाल के परिवार की जरूरतें भी हैं और बच्चों के भविष्य के सपनों की भी राम लाल को फिक्र है।

राम लाल की कहानी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जिन सुविधाओं को हम सामान्य मान लेते हैं, उनके पीछे कितने लोगों का कठिन श्रम छिपा होता है।

हम शौचालय का उपयोग करते हैं और पानी बहा देते हैं। हमें यह चिंता नहीं करनी पड़ती कि वह गंदा पानी कहाँ जाएगा। लेकिन जब सीवर रुकता है, तब हमें अचानक उस व्यवस्था की याद आती है। और उस व्यवस्था को ठीक करने के लिए राम लाल जैसे कर्मचारी की जरूरत होती है।

सबसे कठिन बात यह नहीं कि काम गंदा है। कठिन बात यह है कि समाज कई बार काम को देखकर व्यक्ति की कीमत तय करने लगता है।

राम लाल को भी सम्मान चाहिए। उसे भी सुरक्षित कार्यस्थल चाहिए। उसे भी अपने बच्चों के लिए बेहतर भविष्य चाहिए। उसके सपने किसी दूसरे नागरिक से छोटे नहीं हैं।

सीवरेज सफाई में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न सुरक्षा का होता है। आधुनिक समय में तकनीक और मशीनों का अधिक उपयोग करके मनुष्य को खतरनाक सीवर में उतरने से बचाया जा सकता है। जहाँ मानव हस्तक्षेप आवश्यक हो, वहाँ प्रशिक्षित कर्मचारियों को उचित सुरक्षा उपकरण, गैस की जाँच, निगरानी और आपातकालीन बचाव व्यवस्था उपलब्ध होनी जरूरी है।

राम लाल की कहानी केवल राम लाल की कहानी नहीं है। यह उन हजारों सफाई सेवकों की कहानी का प्रतीक है, जिनका श्रम हमारे शहरों को रहने योग्य बनाता है।

हम स्वच्छ सड़क चाहते हैं, साफ नालियाँ चाहते हैं और बिना रुकावट सीवरेज व्यवस्था चाहते हैं। लेकिन इन सुविधाओं के पीछे काम करने वाले हाथों को सम्मान देना भी हमारी जिम्मेदारी है।

नागरिकों की भी भूमिका है। प्लास्टिक, कपड़े, ठोस कचरा, तेल और अन्य अनुपयुक्त वस्तुएँ नालियों में डालने से सीवर जाम होते हैं और सफाई कर्मचारियों का काम अधिक कठिन तथा जोखिमपूर्ण बन जाता है।

इसलिए स्वच्छता की शुरुआत केवल सफाई सेवक से नहीं, हमसे भी होती है।

राम लाल जब शाम को काम से घर लौटता है, तो राम लाल के कपड़ों पर दिनभर की मेहनत के निशान होते हैं। लेकिन राम लाल के साथ उसके परिवार की उम्मीदें भी घर लौटती हैं। उसके हाथों ने जिस गंदगी को हटाया, उसी से शहर साफ हुआ होता है।

इसलिए राम लाल को केवल एक सफाई सेवक के रूप में नहीं, बल्कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था के महत्वपूर्ण कर्मी के रूप में देखना चाहिए।

राम लाल को दया नहीं चाहिए।

राम लाल को चाहिए: सम्मान, सुरक्षा, उचित पारिश्रमिक और गरिमापूर्ण जीवन।

राम लाल की कहानी हमें यही सिखाती है कि किसी काम की गंदगी से उस काम को करने वाले इंसान की गरिमा कम नहीं होती।

स्वच्छ शहर के पीछे जिन हाथों का पसीना है, उन हाथों का सम्मान करना ही सच्ची स्वच्छता है।

डॉ. विजय गर्ग
सेवानिवृत्त प्रिंसिपल,
मलोट, पंजाब

https://www.instagram.com/cafesocialmagazine/reel/DeJSHMHs_NN

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