राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बनीं पितृमुक्ति महापर्व की प्रथम यजमान
गयाजी

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गयाजी के श्री विष्णुपद मंदिर में पिंडदान कर ‘प्रथम यजमान’ बन गईं। उन्होंने शनिवार, 20 सितम्बर को अपनी ‘सात पीढ़ियों’ की मोक्ष कामना की पूर्ति के लिए पिंडदान किया। गयाजी में पिंडदान करने वाली पहली राष्ट्रपति होने का कीर्तिमान भी उनके नाम दर्ज हो गया।

श्री विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल ने बताया कि विष्णुनगरी में पहली बार किसी राष्ट्रपति ने पिंडदान कर इतिहास रच दिया। यह गयापाल तीर्थ पुरोहित के बही-खातों में कीर्तिमान के रूप में दर्ज हो गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पिंडदान कराने वाले तीर्थ पुरोहित मंगल झंगर ने बताया कि उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ पिंडदान किया। राष्ट्रपति महोदया ने एकदिनी कर्मकांड के तहत तीन फल्गु, विष्णुपद व अक्षयवट वेदियों के लिए पिंडदान का कर्मकांड पूर्ण किया।
कर्मकांड की प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद राष्ट्रपति ने स्वयं विष्णुपद के गर्भगृह में जाकर भगवान श्री हरि के चरणों पर और अक्षयवट में पिंड को छोड़ा। फल्गु में पिंड को उनके ब्राह्मण ने विसर्जित किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के मयूरभंज जिले के पहाड़पुर गांव की निवासी हैं। पहली बार अपने परिवार की ओर से पिंडदान करने द्रौपदी मुर्मू के रूप में गयाजी आई थीं। इसीलिए उन्होंने अपने कुल की सात पीढ़ियों की मोक्ष कामना पूर्ति के लिए पिंडदान किया। ओडिशा के तीर्थ-पुरोहित मंगल झंगर ने उन्हें सारे कर्मकांड कराए।

उल्लेखनीय है कि गयाजी में राष्ट्रपति के पद पर रहते अब तक तीन राष्ट्रपति का आगमन हो चुका है। सबसे पहले राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह विश्व प्रसिद्ध श्री विष्णुपद मंदिर में पहुंचे थे। इसके बाद राष्ट्रपति आर. वेंकटरमन का आगमन हुआ था। दोनों राष्ट्रपतियों ने श्री विष्णुपद के गर्भगृह में जाकर भगवान श्री हरि के पावन चरणों का दर्शन व पूजन किया था, साथ ही तुलसी अर्चना भी की थी।
परंतु पहली बार पद पर रहते किसी राष्ट्रपति ने श्री विष्णुपद में आकर अपने पूर्वजों का पिंडदान किया है — और वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ही हैं।
इस संदर्भ में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संदेश को समझना होगा —
“महिला भी कर्मकांड कर सकती है, यह अब सहज और सामान्य हो गया है… पितृ ऋण सबसे बड़ा ऋण है, जिससे मुक्ति के लिए गया जी में कर्मकांड करना आवश्यक है।”
इसके पूर्व सांसद बांसुरी स्वराज ने भी अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए गयाजी में पिंडदान किया था।
मुकेश व अनंत अंबानी ने किया पिंडदान

उद्योगपति मुकेश अंबानी ने 19 सितम्बर को अपने पुत्र अनंत अंबानी के साथ गयाजी के श्री विष्णुपद मंदिर में अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाने के लिए पूरे विधि-विधान के साथ पिंडदान किया।
उन्हें तीर्थ-पुरोहित व श्री विष्णुपद मंदिर प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभू लाल विट्ठल ने श्राद्ध कर्म व पिंडदान कराया।
इस मौके पर मुकेश अंबानी ने तीर्थ यात्रियों की सुविधा के लिए गयाजी में अत्याधुनिक धर्मशाला बनाने की घोषणा की।
पूर्वजों की मोक्ष के लिए पिंडदान की प्रथा की महत्ता पहुँची सात समंदर पार
पूर्वजों के मोक्ष के लिए पिंडदान की प्रथा की महत्ता का डंका अब सात समंदर पार भी बज रहा है।
रूस, यूक्रेन, स्पेन और अमेरिका से आए कुल 19 नागरिकों ने पूरे विधि-विधान के साथ गयाजी में श्राद्ध कर्म व पिंडदान कर न सिर्फ अपने पूर्वजों के मोक्ष की कामना की, बल्कि विश्व भर में अकाल मृत्यु को प्राप्त लोगों के मोक्ष की भी कामना की।
6 सितम्बर से शुरू हुए पितृपक्ष महासंगम का समापन 21 सितम्बर (आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या) के दिन मुख्य समारोह के साथ हुआ।
इस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बिहार के सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि इस वर्ष पितृपक्ष महासंगम में रिकॉर्ड स्तर पर 30 लाख तीर्थ यात्री गयाजी पहुंचे। इतने बड़े महासंगम में कोई शिकायत न मिलना इसकी बड़ी सफलता रही।
समारोह में प्रमंडलीय आयुक्त डॉ. सफीना ए. एन. ने कहा कि गयाजी में रबर डैम बनने से तीर्थयात्रियों को स्नान-ध्यान, तर्पण व पिंडदान करने में बड़ी सुविधा हुई। उन्होंने कहा, “पितृपक्ष का बहुत प्रचार-प्रसार हुआ है और सुविधाएँ बढ़ने के कारण तीर्थयात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।”
डी.एम. शशांक शुभंकर ने कहा कि पितृपक्ष महासंगम को सफल बनाने में सभी विभागों और सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मेले में सफाई व सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पितृपक्ष महासंगम की तैयारी पर करीबी निगरानी बनाए रखी। यही कारण रहा कि वीवीआईपी मूवमेंट के बावजूद यातायात व्यवस्था तथा अन्य व्यवस्थाएँ काफी सुदृढ़ बनी रहीं।
लेखक: डॉ. अमरनाथ पाठक
(वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार व फिल्म कलाकार)

Senior Journalist, Author, Actor, and
Administrative Officer
Magadh University, Bodh Gaya




