(सर्वथा मौलिक अप्रकाशित) लेखिका: मीना गोदरे, अवनि आपका दिया उत्तम विचार आपको अमर कर सकता है। आप मृत्यु को पार…
Read More »मेरी कलम से
वक्त का पहिया निरंतर चल रहा हैआज जो है वो कल बदल रहा हैवक्त का हमराज बनकर जो चला हैवह…
Read More »मैं खुश हूं कि नहींतुम इस बात की परवाह मत करना पापा!अब अगर ख़ामोश हो भी जाऊं,तो हर बार की…
Read More »जब “मंजिल” से हुई, गुफ्तगू,हर “मोड़” पर “कश्मकश” थी,कभी काँटे लदे,कभी कंकड़ बिछे,“मजबूर” चलने को जिंदगी थी। तूफ़ां तो,कभी हवाओं…
Read More »शब्द तुम बोलते वक्त कहाँ चले जाते हो?समय पर मेरे काम क्यों नहीं आते हो?मैं निःशब्द – सी रिक्त हो…
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