General

श्रद्धांजलि – सीडीएस जनरल बिपिन रावत जी!!

प्रथम रक्षा प्रमुख (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत जी – संजीव जैन

8 दिसंबर 2021 दोपहर 1 बजे के लगभग एक ऐसा दुखद समाचार आया जिसे सुनकर पूरा राष्ट्र स्तब्ध रह गया। तमिलनाडु के कुन्नूर जिले में हुए हेलीकॉप्टर दुर्घटना में देश के प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत का पत्नी मधुलिका रावत व 11 अन्य सैन्य अधिकारियों सहित दुखद निधन हो गया।

      बिपिन रावत अपनी पत्नी एवं अन्य अधिकारियों के साथ वेलिंगटन महाविद्यालय में एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे। वेलिंगटन में सशस्त्र सेनाओं का कॉलेज है जहाँ पर उनका एक भाषण होना था। श्री रावत वायुसेना के प्।च् डप.175 हेलीकॉप्टर में सवार थे। यह हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक था। डबल इंजन वाले इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल  वी वी आई पी ऑपरेशन के लिए किया जाता है।

       16 मार्च 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के द्वारीखाल प्रखंड के सैंण गाँव में जन्मे बिपिन रावत के परिवार की तीन पीढ़ियों ने देश की सेवा की थी। दादा अंग्रेज सेना में सूबेदार के पद पर थे तथा पिता श्री लक्ष्मण सिंह रावत जी भारतीय सेना से लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए।

जनरल रावत की प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के कैंब्रियन हिल स्कूल और शिमला के सैंट एडवर्ड स्कूल में हुई थी। इसके बाद उन्होंने देहरादून स्थित भारतीय सेना अकादमी ज्वाइन कर ली थी। श्री रावत ने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज वेलिंगटन से भी पढ़ाई की थी। उन्होंने अमेरिका की आर्मी कमांड और जनरल स्टाफ कॉलेज से हायर कमांड कोर्स भी किया था। उन्हें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ द्वारा डॉक्टर ऑफ फिलोसॉफी से भी सम्मानित किया गया था।

       बिपिन रावत का विवाह मधुलिका रावत से हुआ था। उनकी दो बेटियाँ भी हैं। श्रीमती मधुलिका रावत आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष भी थीं। वह शहीदों के आश्रितों की भलाई के अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं।

जनरल बिपिन रावत को सबसे भरोसेमंद सैन्य अफसरों में से गिना जाता था। श्री रावत के पास अशांत इलाकों और सेना के विभिन्न पदों पर लगभग 30 वर्ष से अधिक कार्य करने का अनुभव था। जनरल रावत की बहादुरी, समझदारी और सैन्य रणनीति का सब लोग लोहा मानते थे।

आतंकवादियों का सफाया करने और देश के खिलाफ षड्यंत्र करने वालों का सफाया करने वाले जनरल रावत एक सच्चे सैनिक थे। जब आतंकवादियों ने मणिपुर बटालियन के 18 जवानों को मारा था तब एक झटके में ही निर्णय लेकर दूसरे देश की सीमा के उस पार जाकर 11 आतंकवादियों को मौत के घाट उतार कर ही दम लिया था।

बिपिन रावत 16 दिसंबर 1978 को गोरखा राइफल्स की पांचवी बटालियन में भर्ती हुए थे, उसी यूनिट में उनके पिता भी थे। एक मेजर के रूप में उन्होंने उड़ी, जम्मू और कश्मीर में एक कंपनी की कमान संभाली थी। कर्नल के रूप में उन्होंने किबिथू में वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ पूर्वी सेक्टर में पांचवी बटालियन (गोरखा राइफल्स) की कमान संभाली थी। एक ब्रिगेडियर के रूप में उन्होंने सोपोर में राष्ट्रीय राइफल्स के 5 सेक्टर की कमान संभाली। इसके बाद उन्होंने कोंगो लोकतांत्रिक गणराज्य (मोनुस्को) में संयुक्त राष्ट्र मिशन में एक बहुराष्ट्रीय ब्रिगेड की कमान संभाली थी, जहाँ उन्हें दो बार फोर्स कमांडर के प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया था। मेजर जनरल के पद पर पदोन्नति से पहले श्री रावत ने 19वीं इन्फेंट्री डिवीजन (उड़ी) के जनरल ऑफिसर कमांडर का पद पर रहे। लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में पुणे में दक्षिणी सेना तथा दीमापुर में मुख्यालय वाली कोर की कमान संभाली। भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में एक अनुदेशात्मक कार्यकाल सैन्य संचालन निदेशालय में जनरल स्टाफ ऑफीसर ग्रेड 2, मध्य भारत में एक पुनर्गठित आर्मी बैलेंस इन्फैंट्री डिवीजन के लॉजिस्टिक्स स्टाफ ऑफिसर भी रहे। सैन्य सचिव की शाखा में सैन्य सचिव, उप सचिव और जूनियर कमांड बिंग में प्रशिक्षक के साथ-साथ पूर्वी कमान के मेजर जनरल स्टाफ के रूप में काम किया। सेना कमांडर ग्रेड में प्रमोशन मिलने के बाद 1 जनवरी 2016 को जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ दक्षिणी कमान का पद ग्रहण किया। 

11 सितंबर 2016 को सेना के उप प्रमुख का पद ग्रहण किया।

जनरल बिपिन रावत भारत के प्रथम रक्षा प्रमुख अर्थात् चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ थे। श्री रावत 31 दिसंबर 2016 से 31 दिसंबर 2019 तक थल सेना अध्यक्ष भी रहे थे।

पूर्वोत्तर में उग्रवाद को खत्म करने में भी आपका महत्वपूर्ण योगदान रहा था।  सन 2015 में म्यांमार में सीमा-पार ऑपरेशन के तहत आपके नेतृत्व में भारतीय सेना ने छै उग्रवादियों का डटकर सामना किया था। 

सन् 2016 में भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की थी, उस सैन्य कार्यवाही का भी आप हिस्सा रहे थे। एयर स्ट्राइक में भी आपकी मुख्य भूमिका रही थी ।

जनरल बिपिन रावत को उनके कार्यकाल में सैन्य सेवा के दौरान परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, विशिष्ट सेवा पदक, युद्ध सेवा पदक और सेना पदक से सम्मानित किया गया था।

वर्तमान में श्री रावत जी का रक्षा प्रमुख के कार्यकाल का 1 वर्ष बाकी था।

आज पूरा राष्ट्र गमगीन है, सभी के आंखें नम हैं।

कैफे सोशल परिवार भी अपने जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत सहित अन्य सैन्य अधिकारियों को शत्-शत् नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

भारत माता की शान रख, हर भारतीय की पहचान बन गए

जनरल बिपिन आप हम सब भारतीयों की जान बन गए।।

जय हिंद  जय हिंद की सेना

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button