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पिता की डांट से सार्वजनिक जीवन तक का सफर – मणि शंकर चौहान

पिता की एक बात ने  मुझे समाज सेवा और राजनीती मे आने के लिए प्रेरित किया, “अपने लिये तो जानवर भी जीता है, सच्चा इंसान वो होता है ,जो औरो के लिये जीता है”

यह सब कैसे शुरू हुआ? क्या आप हमें अपनी यात्रा के बारे में बता सकते हैं कि किस या किन अनुभवों ने आपको इस रास्ते पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया?

महाराष्ट्र के नागपूर जिल्हे के काटोल तहसील के अरविंद बाबु देशमुख इंजिनिअरींग कॉलेज  से मायनिंग एंड सर्वेईंग इंजिनिअरींग करने के बाद पिता से कुछ अनबन होने पर और मन में कुछ कर गुजरने की ख्वाईश लेकर मुंबई आया, दुर से मुंबई जितनी हसीन दिखाई देती थी, वास्तविकता में उतनी आसान भी नहीं थी, लेकिन एक बात है मुंबई कभी किसी को भुखा नहीं रहने देती, संघर्ष के दिनों में कुछ हिंदी सिरीयल में छोटी मोटी भूमिका भी निभाई, लेकिन बाद में समझ आ गया कि अभिनय क्षेत्र में अपनी कोई जरूरत नहीं, “शायद ईश्वर ने अभिनेता बनाने की बजाय नेता बनाना ज्यादा पसंद किया हो”, कभी सोचा नहीं था कि राजनीति में कभी आऊंगा, लेकिन ईश्वर की कृपा से आ गया, अब आ गया तो कुछ अच्छा ही कर जाऊंगा.

एक कार्यकर्ता के रूप में, आपने बड़े पैमाने पर लोगों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को उठाया है और इसलिए, शासन/सरकार के खिलाफ रास्ता पार किया है। यह चुनौतीपूर्ण होना चाहिए। आपके चुनौतीपूर्ण अनुभव में क्या रहा है या एक कार्यकर्ता होने के नाते आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

आदरणीय शरद पवार साहेब से प्रेरित होकर मैंने २०१४ में अधिकृत तौर पर राष्ट्रवादी काँग्रेस का दामन थामा,(वैसे तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी स्थापना के समय से ही मेरे गॉड-फादर   मा. अनिल देशमुख जी, जिनकी की वजह से  मै जुड़ ही चुका था) और राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी के माध्यम से “मागाठाणे विधानसभा” के लोगो के काम करने का प्रयास किया‌ । और इसी के फलस्वरूप मुझे ‘आदरणीय शरद पवार साहेब’ और ‘आदरणीय अजित पवार साहेब’ ने मुझ जैसे छोटे से कार्यकर्ता को विधानसभा का टिकीट दिया, ऐसा कार्यकर्ता जिसने कभी भी अपने जीवन में कोई भी चुनाव नही लड़ा  था ।  उसपर इतना विश्वास आदरणीय शरद पवार साहेब आदरणीय अजितदादा ने दिखाया इस से बडी कोई मिसाल और इससे बडा  इनाम किसी भी कार्यकर्ता के लिए हो ही नही सकता. चुनाव मे हार जीत तो होती है ,अब हार के डर से हम अगर जनता के लिये लढना  ही छोड दे तो यह तो कायरता  हो गई ना? चुनाव मे जितना ही सबकुछ नहीं होता चुनाव लढने के लिए हौसला जुटाना भी बडी बात होती है.  डोर टू डोर प्रचार करने के बाद भी लोगो का मै विश्वास नही जीत पाया जिसके फलस्वरूप मुझे हार का सामना करना पडा, लेकिन इसका मतलब ये नही है कि मै लोगो के काम करना बंद कर दूंगा  या समाज सेवा करना बंद कर दूंगा  मै आऊंगा फिर आऊंगा और कही गुना जोश के साथ आऊंगा और लोगो के लिये अंतीम सांस तक लढता रहूंगा.

सार्वजनिक जीवन जीना एक तंग रस्सी पर चलने जैसा है - व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन को संतुलित करना, लोगों के लिए सुलभ होना, जांच के दायरे में रहना, मीडिया का बहुत अधिक ध्यान आकर्षित करना और ज्यादातर अनुचित। आप संतुलन बनाने का प्रबंधन कैसे करते हैं?

फिर मुंबई आया तो मा. अनिल देशमुख जी का साथ मिला और मार्गदर्शन मिला, उनको आम जनता के काम करते देख,मुझे भी लगा कि लाईफ में लोगो के लिये ऐसा कुछ काम करना है कि लोग मुझे हमेशा मेरे अच्छे काम और स्वभाव की वजह से जाने। इसी वजह से फिर मैंने राष्ट्रवादी भारतीय मानवाधिकार आंदोलन की शुरुवात कि, जिसके तहत गरीब तबके के लोगो को मदत करना शुरु किया, फिर आम जनता के वाटर,मिटर,गटर, बीएमसी, पोलिस स्टेशन प्रश्न जो मुझ तक आते उनको सुलझाने का हमेशा से प्रयास किया, मेरी  नेक नियती की वजह से मेरा एनजीओ मुंबई के अलावा और भी कही शहरो मे फैला जिस मे लोग जोडते गये लोगो के काम होते रहे, लेकिन कुछ लोग उसका गलत फायदा उठाने लगे इसलिये मुझे बहुत दुख हुवा  फिर मैने इस अपने एनजीओ का गलत फायदा उठाकर लोगो को  परेशान करने वाले ठग किसम के लोगो को बाहर का रास्ता दिखाया. मेरे एनजीओ का अच्छा नाम हो रहा था, तो जाहिर सी बात है कुछ लोग किसी को परेशान करवाने के लिये गलत गलत प्रस्ताव भी लाते थे,जिसको मै ठुकरा देता था. “मैंने प्रण कर लिया था मैं जीवन में कोई ऐसा गलत काम नहीं करूंगा जिससे किसी को हानी हो,इसलिये सदैव लोगो की भरसक मदद करने का प्रयास करता हुं।

आपने वर्ष 2019 में एनसीपी के रूप में चुनाव लड़ा है। सक्रियतावाद और राजनीति की अन्योन्याश्रयता पर आपके क्या विचार हैं?

सभी वर्ग के लोगो को मुफ्त शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा मिले यह मेरा सपना और संकल्प है. मुंबई जैसे शहरो मे बढती आबादी और बढते वाहनो की संख्या को ध्यान रखकर इंटरकनेक्टेड डबल-डेकर ब्रिज का निर्माण करना बहुत जरुरी है और जीतनी भी झोपडपट्टी है उसका विकास कर वहां रह रहे लोगो को फ्लॅट देना और मुंबई मे बारिश की समस्या को देखते हुए अंडरग्राउंड ड्रेनेज बनाना जिसका निकास मुंबई के बाहर करना,और उस पानी को अंडरग्राउंड पाईप लाईन के जरिये ऐसी जगह छोडा जाये जहां पानी को स्टोर किया जाये और जिससे बिजली निर्मिती की जा सकती है किसानो को पाणी दिया जा सकता है और उसी पानी को रिसायकल करके गर्मी के समय मे मुंबई के हि लोगो को उसका फायदा पोहोचाया  जा सकता है.

    इसी तरह इस देश मे ऐसे भी उद्योजक है जो  पचास करोड,सौ करोड दो सौ करोड की लागत से उद्योग लगाना चाहते है ऐसे उद्योजक को सरकार ने मदत करने की जरूरत है उन्हे प्रोत्साहित करने के लिये सब्सिडी देने की जरूरत है ।  ना की किसी एक बडे उद्योजक को बडा करना चाहिए,  सरकार का सपना होना चाहिये कि सबका साथ सबका विकास, चंद मुट्ठी भर उद्योजक कि मोनोपली  खत्म कर के छोटे छोटे उद्योजक उद्योग लगाना चाहते है उन्हे प्रोत्साहित करने का काम सरकारने करना चाहिए, जिस से सभी वर्ग के लोगो को नौकरी मिलेगी और किसी भी बडे उद्योजक की मोनोपली नही रहेगी. और युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते हमेशा खुले  रहेंगे. किसानो के हित मे भी सरकार को काम करना चाहिये, और उन्हें पानी और बिजली देना चाहिए। और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना हो तो सरकार को किसानों को मजबूत करना होगा ।  छोटे छोटे उद्योजको को  मजबूत करना होगा जिससे नए नए रोजगार नई-नई नौकरियां युवाओं को मिलेगी और जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी यह मैं दावे के साथ कहता हूं जिस दिन इस देश का किसान मजबूत हो जाएगा छोटे-छोटे उद्योजक मजबूत हो जाएंगे, तो हमारे देश की अर्थव्यवस्था अपने आप बहुत मजबूत हो जाएगी। अगर सरकार को हमारे देश और हमारे देश की जनता को मजबूत करना है तो एक देश एक कानून ( common civil code) का अमल करना ही होगा। जिस दिन से अगर एक देश एक कानून  अमल में आ जाएगा उसी दिन से इस देश में जातीय दंगे फसाद होना बंद हो जाएंगे। और सभी के धर्म एक समान हो जाएंगे जिससे देश में भाईचारा बढ़ेगा अमन सुकून शांती बढ़ेगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य का स्तर जितना ऊंचा होगा उतना अपना देश मजबूत होगा। एक समान शिक्षा गांव और शहरों के बच्चों को मिलनी चाहिए इसके लिए टीचर और विद्यार्थियों की उपस्थिति में ऑनलाइन क्लासेज स्कूल में होनी चाहिए। एनिमेशन और 2D, 3D के जरिए गांव के बच्चों को भी शिक्षा मिलनी चाहिए, एनिमेशन 2D, 3D होने की वजह से बच्चे शिक्षा को हंसी हंसी और खेल खेल समझ कर उसका ग्रहण करेंगे जिससे उनका विकास होगा,उनका कम्युनिकेशन  स्किल बढ़ेगा और बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए कम्युनिकेशन स्किल का होना बहुत जरूरी होता है।

एक कार्यकर्ता के रूप में आप कौन सी तात्कालिक चुनौतियाँ या चिंताएँ देखते हैं या पूर्वानुमान लगाते हैं जो निकट भविष्य में देश को सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरण और/या सांस्कृतिक दृष्टिकोण से प्रभावित कर सकती हैं?
सामाजिक सक्रियता के माध्यम से सार्वजनिक नीति और देश और समाज की बेहतरी में योगदान देने में रुचि रखने वाले लोगों को आपकी क्या सलाह होगी? इस क्षेत्र में कदम रखने से पहले उन्हें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

देश की अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने के लिये सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य सेक्टर पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, संभव हो तो यह दोनो सेक्टर सरकार के अधिन होने चाहिए, ताकि आम जनता की लुट नहीं होगी। और टुरीजम को बढ़ावा देना चाहिए जिससे परदेशी पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके, उहाहरण के तौर पर भारत देश की जो प्राचीन धरोहर है, किले है, संग्रहालय है, प्राचीन मंदिर, धर्म स्थल, कुतुब मीनार, चारमिनार, ताजमहल और प्राचीन किलो का अच्छी तरह से जिर्णोद्धार कर आजूबाजू का परिसर डेवलप करना चाहिए और यहां तक जितने सैलानी आएंगे उतना ही उस परिसर के लोगों को भी धन अर्जित करने का नौकरी पाने का आयाम खुला होगा। विदेशी पर्यटक और विदेशी निवेश जितना ज्यादा आयेगा उतनी ज्यादा देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, जो गल्तीयां श्रीलंका सरकार ने की है उससे सबक लेकर भारत देश की सरकार को लॉ एंड आर्डर पर ध्यान देना होगा और सांप्रदायिक उन्माद मचाने वालों को समय रहते ही रोकना होगा अन्यथा भारत को भी श्रीलंका बनने में समय नहीं लगेगा जितने ज्यादा सांप्रदायिक दंगे होते हैं,देश और देश की अर्थव्यवस्था उतनी ही पीछे चली जाती है इस बात को सरकार को समझना होगा और इस हेतु सरकार को कठोर कदम उठाने ही होंगे। लघु उद्योग को सरकार जितना ज्यादा बढ़ावा देगी उतने ही ज्यादा रोजगार के आयाम बढ़ेंगे और देश की अर्थव्यवस्था उतनी ही ज्यादा मजबूत होगी। जितने ज्यादा रोजगार के आयाम निर्माण होंगे नौकरियां निर्माण होगी उतना ही ज्यादा सांप्रदायिक ताकतों के बहकावे में आने से युवा पीढ़ी का बचाव हो सकेगा। आज युवाओं के पास नौकरी नहीं है रोजगार नहीं है इसलिए यह बेरोजगार युवा सांप्रदायिक ताकतों के बहकावे में आकर देश का ही नुकसान कर बैठते हैं, वैसे भी एक कहावत है “खाली दिमाग शैतान का घर होता है” इसी वजह से यह बेरोजगार युवा सांप्रदायिक ताकतों का सॉफ्ट टारगेट होते हैं, युवाओं को देश को और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार को रोजगार और नौकरियों पर ज्यादा ध्यान देना होगा।

युवा देश का भविष्य हैं, और वे कम उम्र से ही राजनीति और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। बहुत सारे युवा राजनीति में बदलाव लाना चाहते हैं। भारतीय राजनीतिक परिदृश्य पर, युवा, ऊर्जावान भारतीय ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत हैं।

मणिशंकर चौहान उनमें से एक हैं।  
“कैफ़े सोशल” उनके जज्बे को सलाम करता है और अपनी पत्रिका में इन युवा प्रतिभाओं को हमेशा सम्मानित करता रहेगा ।

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