नीव के पत्थर

पशु हमारे दुश्मन नहीं दोस्त हैं!!

पशु हमारे दुश्मन नहीं दोस्त हैं, इनको भी जीने का अधिकार हमसे कम नहीं : रश्मि शर्मा

– संजीव जैन

अपने लिए तो सभी जीते हैं परन्तु मूक जानवरों के लिए समर्पित होना हर किसी के लिए संभव नहीं है। हमें प्रत्येक जीव के प्रति प्रेम और दया भाव रखना चाहिए, मानवता का यही धर्म है। प्राचीन काल से हम देखते आ रहे हैं कि हमारे देवी-देवताओं के साथ किसी न किसी पशु-पक्षी का संबंध अवश्य रहा है। यह संबंध पशु संरक्षण का प्रतीक है। यह कहना है महू मध्यप्रदेश की रश्मि शर्मा जी का। 

रश्मि शर्मा महू में आवारा श्वानों की सुरक्षा से लेकर उनके लिए भोजन एवं स्वास्थ्य के लिए कार्यरत हैं। इसी के चलते उन्हें लोग श्वानों की माँ के नाम से संबोधित करने लगे हैं।

रश्मि शर्मा जी से मुलाकात कर उनके द्वारा श्वानों के लिए किए जा रहे कार्यों को समझने का अवसर मिला। उस बातचीत के कुछ अंशः

आपका नाम:  मेरा नाम रश्मि शर्मा है और मैं महू में रहती हूँ।

आपकी शिक्षा: मैंने एम ए तक शिक्षा प्राप्त की है।

आप क्या करती हैं 

मैं यश बैंक में नौकरी करती हूँ।

आपके परिवार में कौन-2 हैं

पिता जी सेना से सेवानिवृत एवं माँ ग्रहणी तथा दो बहन और एक भाई है।

श्वानों के प्रति लगाव कैसे हुआ: 

लगभग चार साल पहले में बैंक जा रही थी, सर्दी का मौसम था। रास्ते में मैंने देखा कि एक कुतिया ने हाल ही में बच्चों को जन्म दिया था, वे बच्चे अपनी माँ के सीने से लिपटे हुए थे। उनकी यह दशा देखकर मेरी आँखों में आँसू आ गए। मैंने तुरंत ही उनके लिए दूध और सर्दी से बचने के लिए कपड़ों का इंतजाम किया। उसके बाद रोज बैंक आते- जाते समय उनके लिए भोजन लाती रही। उसके बाद से यह सिलसिला आजतक चल रहा है।

आपको इस कार्य में किसका सहयोग मिलता है: मेरे साथ इस कार्य में मेरी दो बहनें मोहिनी शर्मा (शिक्षक) और आशा शर्मा (अध्ययनरत) हर समय साथ देती हैं। साथ ही सबसे ज्यादा सहयोग व समर्थन अंकल श्री देवकुमार वासुदेवन जी (द नेचर वालंटियर्स) से प्राप्त हो रहा है।

क्या आपने इसके लिए कोई संगठन बनाया है: हमने एक ग्रुप महू वॉलंटियर्स फॉर एनिमल्स बनाया है, हालांकि अभी इसका रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है।इस ग्रुप के माध्यम से अगस्त 2020 से सेना और नागरिक क्षेत्र में  शिविर आयोजित कर 300 श्वानों को रेबीज का टीका एवं 200 श्वानों की नसबंदी कराई है। यह सब पशुप्रेमियों के समर्थन

और दान से कराया है। डॉ विवेक दुबे, डॉ विवेक जैन, डॉ अमित एवं राखी जी का भरपूर सहयोग मिला है। हमारे ग्रुप में रोहित, हिमांशु, किट्टू, ध्रुव जेटली, पवन एवं आनंद आदि का सहयोग प्राप्त होता है।

आपके इस कार्य को लेकर अन्य लोग क्या सोचते हैं हम महू में जिस कालोनी में रहते हैं वहाँ के लोग मेरे इस कार्य से नाखुश हैं। वह सभी लोग विरोध में खड़े रहते हैं। एक मात्र परिवार दीपक, आशा चौहान जी का है जो हमारा समर्थन करते हैं। अब आप ही बताइए कि श्वानों को जीवन जीने का हक नहीं हैघ्

श्वानों की किस तरह से देखभाल करती हैं: सर्वप्रथम जहाँ भी मुझे कोई आवारा श्वान मिलता है तो उसके लिए भोजन का प्रबंध और अगर वह किसी भी प्रकार से चोटिल या बीमार है तो उसका उपचार कराती हूँ ।

आप अपने दैनिक कार्यक्रम में श्वानों को कितना समय देती हैं: बैंक के बाद 23 घंटे मैं इनके लिए काम करती हूँ। सुबह-शाम बहनों के साथ 150 से अधिक श्वानों के लिए रोटी, दलिया, दूध एवं बिस्किट आदि का इंतजाम कर निश्चित जगह पर जाकर उनको खिलाते हैं। इसके अलावा जब भी कहीं से कोई खबर मिलती है या नया कोई श्वान मिलता है तो फिर उसके लिए नए सिरे से काम करती हूँ।

 आपको कभी किसी अप्रिय घटना का सामना करना पड़ा: हमारे घर में पाँच पालतू श्वान हैं। एक बार कॉलोनी के एक सदस्य ने एक गर्भवती आवारा श्वान की हत्या कर दी और दूसरे ने 14 जनवरी 2018 को एक श्वान को जहर दे दिया। हम दोनों बहनें पोस्टमार्टम के लिए श्वान को लेकर गईं। उस जाँच से पता चला कि उनकी मौत जहर देने से ही हुई है, तब हम दोनों ने उस आदमी के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराने का फैसला किया। अपराधी ने पहले मामले को हल्के में लिया क्योंकि उन्हें लगा कि आवारा श्वानों की कौन परवाह करता है। लेकिन बडगोंदा पुलिस के सहयोग से हमने कानूनी प्रक्रिया पूरी की। उनके खिलाफ केस दर्ज करा दिया। अपराधी ने वाद में अपने अधिवक्ता के माध्यम से इस केस में समझौता करने की कोशिश की लेकिन मैंने मना कर दिया। मामला अभी भी अदालत में चल रहा है।

दूसरी घटना 26 जून 2020 की है। सुबह लगभग 9 बजे मेरी बहन मोहिनी इन श्वानों के लिए खाना बना रही थी तब उसने एक बच्चे को चिल्लाते हुए सुना। वह बाहर आई और देखा कि उसके सभी श्वान बालकनी में चुपचाप बैठे हैं। लेकिन कॉलोनी के कई रहवासी चिल्ला रहे थे कि उनके एक बच्चे को मेरे श्वान ने काट लिया है। उन्होंने एक श्वान की तरफ इशारा किया जो बंद गेट के अंदर बैठा था। मोहिनी ने उनसे कहा कि जब वह अंदर है तो कैसे काट लिया। फिर भी अपनी संतुष्टि के लिए मैंने उस लड़के की जांच कराई, लेकिन काटने के कोई निशान नहीं थे। मैंने अनावश्यक लड़ाई मैं लिप्त ना होने का फैसला किया। बाद में मेरी बहन मोहिनी को पता चला कि वह लोग श्वानों के खिलाफ शिकायत करने की योजना बना रहे हैं।  हम लोगों ने सोचा कि हम और हमारा काम गलत नहीं है तो डर किस बात का। दूसरे लोग जो करना चाहते हैं करें।

कॉलोनी के लोगों ने अपने संपर्कों का उपयोग कर झूठी मेडिकल रिपोर्ट बनाई और पुलिस स्टेशन पहुँच गए और अपने एक रिश्तेदार पत्रकार की मदद से रिपोर्ट दर्ज करा दी। दोपहर 2 बजे के आसपास कॉलोनी के लोग हमारे घर के बाहर शोर मचाने लगे, उन्होंने हमारे परिवार के साथ दुर्व्यवहार भी किया। मेरी बहन मोहिनी से मारपीट की और हरिजन अधिनियम के तहत मुकद्दमा दर्ज करा दिया। एक पत्रकार ने हमारे परिवार से बिना बयान लिए एक झूठी खबर बनाई जिसे समाचार-पत्र और स्थानीय समाचार चैनल में प्रकाशित -प्रसारित कर दिया। 30 जून 2020 को कॉलोनी के लोगों ने अवैध रूप से श्वान पकड़ने वाले को बुलाया और एक श्वान को बेरहमी से बाँध दिया उसका काफी खून बह रहा था। मेरी बहन मोहिनी ने अनुमति-पत्र मांगा तो उन्होंने दिखाने से इनकार कर दिया क्योंकि उनके पास कोई पत्र नहीं था। बाद में मैंने पुलिस को फोन किया पुलिस ने आकर मामले को सुलझाने की कोशिश की लेकिन कालोनी के लोगों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। वंदना जी के सहयोग और तत्कालीन एस डी एम साहब के हस्तक्षेप से उस समय मामला निपट गया। वो लोग अब हमारे विरोध में खुलकर नहीं आते है। मेरा परिवार आज भी न्याय के लिए लड़ रहा है।

पशु अधिकारों के लिए क्या कोई कानूनी प्रावधान हैं- जी हाँ कानून हैं। किसी भी जानवर को मारना-पीटना, पत्थर या लाठी से मारना, उसे उसकी जगह से भगाना, ऐसा कोई भी काम करना जिससे उसे पीड़ा पहुँचे, प्रताड़ित करने या जान से मारने पर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 111 और भारतीय दंड संहिता धारा 429 के तहत दंडनीय अपराध है। इसके लिए 5 वर्ष का कारावास हो सकता है।

आप लोगों को क्या संदेश देना चाहेंगी: हमारा उद्देश्य किसी से लड़ाई करना नहीं बल्कि जानवरों की सेवा कर उन्हें बचाना है और जो कार्य मैं कर रही हूँ उसके लिए लोगों से यही निवेदन करती हूँ कि इन मूक जानवरों को भी जीने दो, ऐ हमारे सच्चे दोस्त हैं इन्हें भी जीने का हक है और उन्हें भी अपनी जिंदगी जीने दी जाए।

कैफे सोशल और इनबुक फाउंडेशन का आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि इन बहनों के द्वारा श्वानों के लिए किए जा रहे सामाजिक कार्य में सहयोग करें और अपने आस पास के मूक जानवरों को यथासंभव मदद करने का प्रयास करें।

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