नीव के पत्थर

टाटा स्मारक अस्पताल, मुम्बई के डॉक्टर पी. एन. जैन से बातचीत के पल

Er. Vidhi Praveen Jain RJ, Vividh Bharti, Ali Sayed.

कैंसर का प्राणघातक रोग आज भारत में बहुत तेजी से पैर पसार रहा है, इसके उपचार के लिए नये-नये शोध हो रहे हैं और कुछ छोटी सफलताएँ भी मिल रही हैं, पर इसका कोई कारगर उपचार अब तक एक अबूझ पहेली बना हुआ है। इसी विषय पर बातचीत करने के लिए हमारी सह-संपादिका श्रीमती विधि प्रवीण जैन ने मुंबई स्थित टाटा स्मारक अस्पताल के निश्चेतना विज्ञान विभाग (एनेस्थिसिया) के प्रमुख डॉ. श्री पी. एन. जैन साध से समय माँगा और उन्होंने सहज ही उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया।


कैफे सोशल के संपादक-मंडल से विधि प्रवीण जैन और आबिद अली ने डॉ. पी. एन. जैन से बातचीत की, उसी के मुख्यांश यहा
प्रकाशित कर रहे हैं –

क्या आपके मन में अपने बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना था?
डॉ. जैन विधि जी बचपन में तो मुझे नहीं पता था कि में आगे चलकर डॉक्टर बनूँगा क्योंकि मेरे परिवार में कोई ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था। मेरा जन्म मैनपुरी में हुआ था। हम चार भाई है। स्कूलों शिक्षा के बाद मैंने मध्यप्रदेश पीएमटी पास कर ली और बहुत संघर्षों के बाद ट्यूशन पढ़ाते हुए मैंने अपनी चिकित्सा विज्ञान (एमबीबीएस) की पढ़ाई पूरी की। मेरे द्वारा ट्यूशन पढ़ाए गए बच्चे भी डॉक्टर बन चुके हैं। मैं 1985 में दिल्ली गया था और वहाँ कई अस्पतालों में मैंने विभिन्न पदों पर काम किया। 1985 में एमड़ी की पढ़ाई पूरी की। एनेस्थेटिस्ट के रूप में दिल्ली के कई अस्पतालों जैसे लोहिया अस्पताल, पंत अस्पताल इत्यादि में काम किया। राजस्थान के उदयपुर में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में चार साल कार्य किया।


आप को मरीजों की सेवा की प्रेरणा कहाँ से मिलती है?

डॉ. जैन- मेरा पहला बेटा जन्म से मानसिक रूप से अशक्त था। उसकी अच्छी पढ़ाई के लिए 1981 में हम मुम्बई आ गये। यहाँ टाटा स्मारक अस्पताल में प्रशिक्षण लिया और फिर यहीं मेरी पदस्थापना भी हो गई। मैने टाटा स्मारक अस्पताल में 30 वर्ष तक काम किया और अभी भी अपनी सेवाएं दे रहा हूँ। एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख के पढ़ से 30 जून 2021 को में रिटायर हो गया है। इसके बाद प्रबंधन ने मुझे उपशामक औषधि अर्थात् Palliative Medicine विभाग का काम सौंपा गया है। इसमें में कैंसर के गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों पर काम कर रहा हूँ।

आपने जीवन में कई उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। जैसे आपने अपने बलबूते पर मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। दूसरी उपलब्धि आप अपने बच्चे के लिए मुम्बई आए। तीसरी प्रमुख उपलब्धि आप सेवानिवृत्ति के बाद भी निःस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। आपके व्यक्तित्व की एक बात प्रमुख यह है कि आप सभी की मदद करते हैं।

डॉ. जैन- मेरे पास कोई भी आ सकता है, मुझे उसके इलाज के लिए किसी की भी चिट्ठी पत्री की ज़रूरत नहीं। जिन मरीजों के पास पैसे नहीं होते हैं, उन मरीजों की पूरी तरह से मदद करना मुझे बहुत अच्छा लगता है।

आपके पास गंभीर रूप से पीड़ित मरीज भी आते हैं तो क्या आपने मनोविज्ञान पढ़ा है ?

डॉ. जैन- रोगी का उपचार करने के लिए मनोविज्ञान पढ़ना जरूरी नहीं है। इसमें संवेदनशील होना जरूरी है, जो मैं हूँ। उनके साथ मित्रवत व्यवहार करता हूँ। कोशिश करता हूँ कि मेरे पास से कोई भी मरीज़ निराश होकर ना जाए। मरीजों को सहानुभूति की बहुत जरूरत होती है। मैं हर संभव कोशिश करता हूँ कि में आने वाले हर मरीज को देख सकूँ। टाटा मेमोरियल अस्पताल में अपना उपचार कराने के लिए हर वर्ष देशभर से लगभग 60,000 रोगी आते हैं, जो एक बड़ी भारी संख्या है। जिनमें मुख्य रूप से महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश और बंगाल के मरीज अधिक आते हैं। सबसे ज्यादा मरीज उत्तरप्रदेश से आते हैं।

उत्तरप्रदेश से ज्यादा मरीज आने का कोई विशेष कारण है?

डॉ. जैन उत्तर प्रदेश में कैंसर के उपचार की अच्छी व्यवस्थाएँ नहीं होने के कारण वे टाटा मेमोरियल अस्पताल मुम्बई आते हैं और देशभर में टाटा अस्पताल का नाम कैंसर के उपचार में सबसे ऊपर है। इस अस्पताल में जो बीमार बच्चे इलाज के लिए आते हैं, उनके साथ साथ उनके माता-पिता को भी व्यवस्थाएँ प्रदान की जाती है। इसमें हमारे उपशामक उपचार विभाग (palliative department) द्वारा जरुरतमंद मरीजों को निशुल्क औषधियाँ दी जाती हैं। हमारी हर संभव कोशिश रहती है कि रोगियों की मदद कर सकें। भारतीय रेल भी हमारे मरीजों के लिए बहुत मददगार साबित होती है। यदि मरीज स्लीपर क्लास से टाटा मेमोरियल अस्पताल में आता है तो उन्हें पूरी यात्रा निशुल्क रहती है। टाटा अस्पताल में गरीबी रेखा के नीचे के रोगियों का उपचार निशुल्क किया जाता है। साथ ही यदि जाँच रहती है तो वह भी बहुत कम दर पर की जाती हैं। अस्पताल का कोई भी विभाग कोविड काल में भी कभी बंद नहीं किया गया।

कैंसर रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता सबसे कम मानी जाती है, उनके संक्रमित होने का खतरा सबसे अधिक होता है। ऐसे भयावह कोविडकाल आप सभी डॉक्टरों ने अपने आप को कैसे सुरक्षित रखा?

डॉ. जैन- आम दिनों की तुलना में कोविड के दौरान टाटा मेमोरियल अस्पताल में मरीज कम आ पाए। इस अस्पताल में सामान्य दिनों में लगभग 2000 मरीज प्रतिदिन आते हैं और 300 से 400 नई फाइलें बनती हैं। हमारे डॉक्टर अपने हर मरीज के मन में खरा उतरना चाहते है। अपने हर मरीज की तकलीफ़ में डॉक्टर हमेशा साथ रहते हैं इसलिए कोविड के दौरान भी बड़ी तकलीफ़ नही आई। ऑपरेशन के दौरान तो हम डॉक्टर 12-15 घंटे का उपवास अपने मरीजों के लिए करते ही हैं और हम सभी स्वान्त सुखाय काम करते हैं

क्या आपको कभी अपने मरीजों की बातों पर गुस्सा नही आता?

डॉ. जैन- हाँ कई बार ऐसा होता है। हमारे गुरुजी कहते हैं कि यदि हम किसी की सहायता कर रहे हैं तो हमें उसे याद नहीं रखना चाहिए। साथ ही जैसे यदि किसी को दान दिया तो सोच समझ कर देना चाहिए। जैसे जैन धर्म के अनुसार हम किसी को दान देते हैं तो उसकी जानकारी लेकर ही देते हैं ताकि दान का सही उपयोग हो।

सर, हमारा इनबुक फाउंडेशन भी बच्चों के विकास के लिए काम कर रहा है। कई गाँवों में और कई क्षेत्रों में हमने पुस्तकालय खोले हैं और बच्चों में पढ़ने की रुचि जगाने के उद्देश्य से पुस्तकें प्रदान करते है। पुस्तकालय के संचालन के लिए पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) भी नियुक्त किये जाते हैं, जो कि उन्हीं गावों से होते हैं। इस मिशन में हमारे साथ कई लोग जुड़ते जा रहे हैं। आप हमें क्या मार्गदर्शन देंगे।

डॉ. जैन- मैं चाहता हूँ कि आप पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के शरीर में विटामन और प्रोटीन की पूर्ति के लिए प्रयास करें क्योंकि उनका शरीर स्वस्थ रहेगा, तो मन भी स्वस्थ रहेगा। आप केवल बच्चों कीपढ़ाई पर ही काम न करें बल्कि उनमें पोषक भोजन के प्रति जागरुकता लाएँ और उनके लिए ऐसे भोजन की व्यवस्था भी करें।



आप सभी डॉक्टरों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जिसमें अनेक प्रकार की बड़ी तकनीकी समस्याएँ भी होती हैं तो उन स्थितियों में आप क्या करते हैं?

डॉ. जैन- रोगी व्यक्ति यह नहीं समझता है कि हमारे अस्पताल में विशेष जाँचों और शल्य चिकित्सा के लिए कई बार वेटिंग 2 से 3 महीने तक की होती है। और वे चाहते हैं कि उनका उपचार जल्दी से जल्दी हो जाए, डॉक्टर हमेशा हमारे सामने हो और हमारे इलाज में कोई रुकावट नहीं आए। पर हम कई बार गंभीर रोगियों की भी तकनीकी कारणों से कई बार चाह कर भी मदद नहीं कर पाते हैं। हम सभी डॉक्टर चाहते है कि मरीज हमें समझें, हमारी सीमाओं को समझें और हमें उनके इलाज के लिए समय है। हम उनका इलाज पूरी तरह से कर रहते हैं और करना चाहते हैं।

अंतिम प्रश्न – टाटा मेमोरियल अस्पताल के एक महत्वपूर्ण डॉक्टर और जैन समाज के सम्माननीय सदस्य होने के नाते आप समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं?

डॉ. जैन- मैं चाहता हूँ कि हम समाज के गरीब तबके के लोगों की सहायता करें। स्वास्थ्य विभाग भी कहता है कि हमारे देश की बड़ी समस्या गरीबी है तो हमें गरीबों को स्वास्थ्य सेवाएँ और दान देना चाहिए। चीफ मिनिस्टर फंड से भी गरीब मरीज़ों को मदद मिलती है। हमें कैंसर जैसी बीमारी से पीड़ित लोगों को इन सभी योजनाओं से परिचित कराना चाहिए। टाटा मेमोरियल में केवट नाम की योजना चल रही है। जिसमें कई युवा हमारे गरीब मरीज़ों को सहायता करतेहैं। हर वर्ष भारत में लगभग 10 लाख कैंसर के मरीज आर रहे हैं और 6 लाख मरीजों की मृत्यु भी प्रति वर्ष होती है। हमारे लगभग 40 नये कैंसर अस्पताल भारत के कोने कोने में बन रहे हैं। हम कैंसर रोगियों की हर संभव सहायता करना चाहते हैं और कर रहे हैं। नई-नई मशीने लग रही हैं। टाटा मेमोरियल अस्पताल ऑटोमैटिक एनर्जी के तहत काम कर रहा है। जो मरीज बहुत गरीब हैं, हम उन की सेवा करना चाहते हैं।


सर, कैंसर से हम अपने आप को कैसे बचाएँ?

डॉ. जैन- हम अपने खानपान पर ध्यान देकर कैंसर से बच सकते हैं। हमारी दिनचर्या इसमें प्रभावी भूमिका निभाती है। हमें सिगरेट, तंबाकू, शराब और माँसाहर से बचना चाहिए। फल-सब्ज़ी भी बिना कीटनाशक दवाई वाली खानी चाहिए। पानी भी स्वच्छ पीना चाहिए वर्तमान समय में उपलब्ध मिनरल वॉटर सबसे ज़्यादा ख़राब होता है। कैंसर का एक मुख्य कारण तनाव भी होता है इसलिए हमें तनाव से बचना चाहिए।

एक शोध सामने आया है कि भारत एक ऐसा देश है जिसमें विश्व के सभी देशों की तुलना में सबसे कम कैंसर के मरीज हैं। इसका एक कारण यही है कि भारत में प्रायः लोग डिब्बाबंद भोजन के बदले ताजा भोजन लेते हैं जबकि अन्य देशों में लोग फ्रिज में रखा हुआ और डिब्बाबंद भोजन लेते हैं।

मैं भारत की आज की युवा पीढ़ी से एक बात कहना चाहता हूँ कि आप जंक फूड, फास्ट फूड मत खाइए। किसी भी तरह के साफ्ट ड्रिंक ना पीकर ताजा फलों का रस पीजिए। पानी भी आप बिसलरी का मत पीजिए क्योंकि यह पानी कई दिनों पुराना होता है जिसके मिनरल नष्ट हो जाते हैं। अपने घर का छना हुआ पानी पीजिए। अपनी जीवन चर्या शुद्ध बनाएँ, सुबह की सैर, योग-प्राणायाम, व्यायाम करें और कैंसर जैसी बीमारियों से दूर रहें।

डॉक्टर साहब हमसे बातचीत करने, हमें इतना समय देने और हमारे साथ अपने अद्भुत अनुभव साझा करने के लिए आपका बहुत-2 आभार।

DR. P.N. Jain
MD. FAMS, FICA FIAPM Professor,
Palliative Medicine Tata Memorial Hospital Mumbai (Bharat) Hospital Mumbai – India.

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