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गुमनाम नायक – कमला देवी चट्टोपाध्याय

-संजीव जैन
कमला देवी चट्टोपाध्याय

देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों ने बढ़-चढ़कर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था और अपने प्राणों की आहुति दी थी। बहुत से स्वतंत्रता सेनानी ऐसे भी हुए थे जो निस्वार्थ भाव से मातृभूमि की सेवा में लगे रहे । ऐसे ही कुछ नायकों के योगदान को देश आज पहचानता है लेकिन बहुत से सेनानियों के बलिदान को इतिहास में वो स्थान नहीं मिला जो उन्हें मिलना चाहिए था।

ऐसे ही गुमनाम चेहरों में से एक थी गांधी जी के साथ आंदोलन में भाग लेने वाली समाज सुधारक, उद्यमी, लेखक, कलाकार और भारतीय हस्तकला को पुनर्जीवित करने वाली कमलादेवी चट्टोपाध्याय।

कमला देवी का जन्म 3 अप्रैल 1903 को कर्नाटक के मैंगलोर  शहर में हुआ था। पिता आनंद धारेश्वर मैंगलोर के कलेक्टर थे, और माँ गिरिजा बाई सुशिक्षित महिला थीं। प्रारंभिक शिक्षा के साथ ही आपका विवाह 14 वर्ष की आयु में कर दिया गया था। लेकिन दुर्भाग्य से शादी के 2 साल बाद ही उनके पति का निधन हो गया था।

कमला देवी नारी आंदोलन की पथ प्रदर्शक तथा भारतीय हस्तकला के क्षेत्र में नवजागरण लाने वाली महिला थी। वे कला और साहित्य की समर्थक भी थीं। कमला देवी उस मजबूत विचारधारा की थीं। वे सभी धर्मों का सम्मान, बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के विरोध, विधवाओं के पुनर्विवाह के लिए आवाज उठाती रही थीं। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में नारियों का आह्वान कर उन्हें आंदोलन में भाग लेने को प्रेरित किया था।

   वर्ष 1919 में अपनी पसंद से ही सरोजिनी नायडू के छोटे भाई हरिंद्रनाथ चट्टोपाध्याय के साथ पुनर्विवाह कर लंदन चली गई थीं। यहाँ पर भी पुनः दुर्भाग्य से पति-पत्नी में विचारधाराओं में मेल नहीं होने के कारण यह संबंध भी अधिक समय तक नहीं चला और अंत में तलाक हो गया था।

 वर्ष 1930 में गाँधीजी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन चलाया और उनके आह्वान पर आप भी देश वापस आकर इस आंदोलन से जुड़ गयीं।

  नमक सत्याग्रह के दौरान पुलिस से संघर्ष कर कमला देवी और उनके साथियों ने नमक बनाया और थैलियाँ बनाकर बेचना शुरू कर दिया। बंबई शेयर बाजार में पहुँचकर नमक के पैकेट नीलाम किए। यहाँ पर नमक नीलामी करने के बाद वो उच्च न्यायालय पहुँच गई। उच्च न्यायालय में मौजूद जज से पूछा कि क्या वह फ्रीडम साल्ट अर्थात् आजादी का नमक खरीदना चाहेंगे। इस घटना से कमला देवी की निडरता की कहानी पूरे देश में फैल गई थी। कुछ समय बाद उन्हें नमक कानून तोड़ने के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। इस प्रकार गिरफ्तार होने वाली वे पहली भारतीय महिला थीं। स्वतंत्रता आंदोलन में आप चार बार जेल गई और इस प्रकार लगभग 5 वर्ष तक जेल में रहीं।

कमला देवी ऐसी पहली भारतीय महिला थीं जिन्होंने हथकरघा और हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी। ग्रामीण इलाकों में घूम-घूम कर हस्तशिल्प और हथकरघा कलाओं का संग्रह किया तथा अपने देश के बुनकरों के साथ रहकर उनके लिए बहुत काम भी किया था। जब भी गाँवों में जाती थीं तो लोग अपने सिर से पगड़ी उतारकर उनके कदमों में रख देते थे, लोगों ने उनकी सेवा की भावना से प्रेरित होकर उनको हथकरघा माँ का नाम ही दे दिया था।

समाज व राष्ट्र सेवा के लिए भारत सरकार ने वर्ष 1955 में आपको पद्म भूषण तथा वर्ष 1987 में पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया। वर्ष 1966 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, यूनेस्को ने 1977 में हस्थकला को बढ़ावा देने के लिए सम्मान और शांति निकेतन ने अपने सर्वोच्च सम्मान देसि कोट्टमष्से सम्मानित किया।

कमला देवी ने कई किताबें भी लिखी थी तथा कुछ मूक फिल्मों में अभिनय भी किया था।

29 अक्टूबर 1988 में 85 वर्ष की आयु में आप का स्वर्गवास हो गया । “कैफे सोशल” मासिक पत्रिका राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाली बहुमुखी प्रतिभा की धनी कमला देवी चट्टोपाध्याय को शत-शत नमन करता है।

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