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कुन्नूर हेलिकॉप्टर हादसा – क्या ब्लैक बॉक्स से मिलेगा कोई सुराग?

कुन्नूर हेलिकॉप्टर हादसा: सीडीएस के निधन के बाद जांच शुरू, क्या ब्लैक बॉक्स से मिलेगा कोई सुराग?

विस्तार

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका और 12 अन्य सैन्य अधिकारियों की जिस हेलीकॉप्टर दुर्घटना में जान गई है। यहा हादसा हाल की विमानन आपदाओं में सबसे वीभत्स हादसा माना जा रहा है।

9 दिसंबर को संसद में दिए गए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान के अनुसार, जनरल रावत समेत 14 लोगों को लेकर Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर 8 दिसंबर को सुबह 11.48 बजे सुलूर एयर बेस से रवाना हुआ और दोपहर 12.15 बजे वेलिंगटन में उतरने वाला था। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोपहर 12.08 बजे हवाई यातायात नियंत्रण का हेलीकॉप्टर से संपर्क टूट गया और स्थानीय लोगों ने हेलिकॉप्टर के जलते हुए मलबे को देखा, तभी उसमें सवार लोगों के जीवन को लेकर कयास लगने लगे थे।

यह देखते हुए कि हेलिकॉप्टर से संपर्क टूट जाने और उसके दुर्घटनाग्रस्त होने के बीच बस कुछ ही मिनट का अंतर था, सवाल उठता है कि ऐसा क्या हुआ था कि ये हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ। इसके इतर, गुरुवार को, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा की कि एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ ट्रेनिंग कमांड एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह के नेतृत्व में भारतीय वायु सेना द्वारा एक त्रि-सेवा जांच की जाएगी।

इसके बाद हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारणों का पता लगाने के लिए Mi-17 V5 के ब्लैक बॉक्स को रक्षा अधिकारियों ने गुरुवार सुबह दुर्घटनास्थल से बरामद भी कर लिया।

क्या ब्लैक बॉक्स से जांच में मिलेगा कोई सुराग?

सबसे पहले आप ये जान लें कि, एक ब्लैक बॉक्स न तो काला रंग का होता है और न ही ये किसी बॉक्स के आकार का होता है। ये अवश्य है कि, इसकी दृश्यता और कंप्रेसर के आकार को बढ़ाने के लिए यह चमकीले नारंगी रंग का होता है। ये डिवाइस होती है, जिसका वजन आमतौर पर लगभग 4.5 किलोग्राम होता है। इसमें एक हार्ड डिस्क या एक मेमोरी कार्ड लगा होता है जो उड़ान गति, ऊंचाई, ऑटोपायलट स्थिति, रोल, पिच, परिवेश शोर और कॉकपिट वार्तालाप सहित 88 महत्वपूर्ण मापदंडों का डेटा एकत्र करता है।

आमतौर पर, स्टील या एल्युमीनियम से बनी ‘क्रैश सर्वाइवेबल मेमोरी यूनिट’ के भीतर दो घटक रखे जाते हैं – एक फ़्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR), जो दर्जनों अन्य मापदंडों के बीच, फ़्लाइट हिस्ट्री को स्टोर करता है और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR), जो कॉकपिट की गतिविधियां रिकॉर्ड करता है। पायलटों के बीच बातचीत सहित कॉकपिट के भीतर सभी ध्वनियाँ इसी सीवीआर में स्टोर होती हैं।

ब्लैक बॉक्स को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि ये अत्यधिक तापमान और दबावों का सामना कर सकें। हालांकि, ज्यादा लंबे वक्त तक आग की लपटों और उच्च दबाव के बीच ये क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।

कुन्नूर हेलिकॉप्टर क्रैश के मामले में, ब्लैक बॉक्स हासिल करने के बाद, अब जांचकर्ता यह आकलन करेंगे कि क्या ब्लैक बॉक्स के डेटा को रिकवर किया जा सकता है या नहीं।

यदि, डेटा को कोई नुकसान नहीं हुआ है, तो जांचकर्ता यह समझने की कोशिश करेंगे कि दुर्घटना से ठीक पहले वास्तव में क्या हुआ था। क्या पायलटों ने हेलीकॉप्टर से नियंत्रण खो दिया? क्या खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ? या पायलट ही खुद किसी कारण से अक्षम थे?

कुछ मामलों में, तकनीशियनों को ब्लैक बॉक्स में डेटा को समझने में दिन, सप्ताह और कभी-कभी महीनों भी लग सकते हैं, और घटना की हाई-प्रोफाइल प्रकृति और संवेदनशीलता को देखते हुए, कोई निश्चित निष्कर्ष निकालने के लिए जांचकर्ता पहले पूरी तरह से जांच करने के इच्छुक होंगे।

कुन्नूर हेलीकॉप्टर क्रैश मामला अभी जांच का विषय है। लेकिन यह उल्लेखनीय है कि ब्लैक बॉक्स सूचना का एकमात्र स्रोत नहीं है जिसे जांचकर्ता देख रहे होंगे। ज्यादातर मामलों में, जांचकर्ता इसके बाहरी हिस्से का विश्लेषण करने से पहले मलबे के टुकड़ों को हासिल करते हैं, ताकि किसी चीज से हेलिकॉप्टर के टकराने की संभावना को जाना जा सके। इसके अलावा, घटना के बाद, दुर्घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जो ये समझने में मदद करेंगे कि ये हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त कैसे हुई?

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