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एक रुका हुआ फैसला – चित्रगुप्त

एक रुका हुआ फैसला – चित्रगुप्त अवैतनिक अधिकारी। धर्मराज के लेखपाल का हमनाम

हमारे समाज में भ्रष्टाचार भी ईश्वर की तरह सर्वव्यापी है फिर भी हर आदमी अपने आपको ईमानदार बोलता है। समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार और पाखंड पर चोट करती हुई व्यंग्य श्रृंखला का चौथा भाग

आम आदमी मुंशी तोताराम

भोजन के बाद न्यायालय की कार्यवाही फिर से शुरू हुई। वहां पर बैठे हुए लोगों में कानाफूसी चल रही थी क्योंकि अब तक जितने भी गवाह आए थे वह किसी भी प्रकार से मामा मारीच को दोषी सिद्ध ना कर सके थे । बल्कि मामा मारीच को दोषी सिद्ध करने के चक्कर में वो लोग खुद अपनी इज्जत से खिलवाड़ कर जा चुके थे। लोग सोच रहे थे कि अगला गवाह कौन होगा तभी मुंशी तोताराम ने अपने आप को गवाही के लिए प्रस्तुत किया। मुंशी तोताराम एक सामान्य नागरिक थे। मायापुरी के नागरिक उनको देखकर हतप्रभ रह गए क्योंकि एक तो ज्यादातर लोग उनको जानते नहीं थे और जो जानते थे उनको पता था कि मुंशी तोताराम एक बहुत ही साधारण आम आदमी है। उन्होंने अपने जीवन में ऐसा कोई काम नहीं किया था जिससे वह लोगों के बीच में जाने जाए इसलिए उनका गवाही के लिए आना लोगों को आश्चर्यजनक लग रहा था। जब वो गवाही के लिए आए तो मामा मारीच ने उनसे प्रश्न पूछना शुरू किये!

मामा मारीच: आपका नाम और व्यवसाय क्या है?

मुंशी तोताराम: मेरा नाम मुंशी तोताराम है, और में एक आम आदमी हूं। व्यवसाय के नाम पर ज्यादा कुछ नहीं है, लेकिन हां आप कह सकते हैं कि मैं एक व्यवसायिक मतदाता हूं। और मेरे मत से ही स्वप्नलोक की लोकतांत्रिक व्यवस्था चलती है।

मामा मारीच: (आश्चर्यचकित होते हुए) व्यवसायिक मतदाता क्या होता है?

मुंशी तोताराम: व्यवसायिक मतदाता वह होता है जो हर चुनाव में अपने हित ना देखते हुए उस उम्मीदवार के हित को देखता है जो उसको धन के दर्शन और मदिरा का पान कराता है ।

मामा मारीच: तो आप व्यवसायिक मतदाता है! 

मुंशी तोताराम:  हां जी!

 मामा मारीच:  तो फिर आप अपना जीवन यापन कैसे करते हैं?

 मुंशी तोताराम:  एक आम आदमी के लिए जीवन यापन करना बड़ा आसान है क्योंकि यापन करने के लिए जीवन होता ही नहीं है। रही बात शरीर को जिंदा रखने की तो उसके लिए सरकार ने समय-समय पर बहुत सारी योजनाएं चला रखी है। उन योजनाओं से होने वाली बरसात की कुछ बूंदे हमारे ऊपर भी गिर जाती हैं। वह गिरी हुई कुछ बूंदे हमारे तथाकथित जीवन यापन के लिए बहुत होती हैं।  फिर (मुस्कुराते हुए) आपने भी तो एक योजना चलाई थी, हम जैसे व्यवसायिक मतदाता और आम आदमी के लिए।

मामा मारीच: (मुस्कुराते हुए)  आपको पता है इस गवाही का उद्देश्य क्या है?

मुंशी तोताराम: हां जी आपको सजा दिलवाना।

मामा मारीच:  हां तो मुंशी तोताराम जी आपको लगता है आप ईमानदार हैं?

मुंशी तोताराम: अवश्य मैं एक ईमानदार आम आदमी हूँ और मुझे ध्यान नहीं है कि मैंने अपने जीवन में कभी कोई बेईमानी की हो,क्योंकि मुझे बेईमानी करने का कोई अवसर ही नहीं मिला। हां आप यह कह सकते हैं कि मेरी ईमानदारी को परखा ही नहीं गया है। लेकिन यह तर्क काफी नहीं है मुझे बेईमान साबित करने के लिए । अगर मुझे कोई मौका नहीं मिला है बेईमानी करने के लिए तो भी एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है स्वप्नलोक के प्रशासन के ऊपर जिसने कभी भी आम नागरिक को अवसर ही नहीं दिए।

“मुंशी तोताराम की वाकपटुता से वहां पर उपस्थित लोग काफी प्रभावित हो रहे थे, यहां तक की माननीय न्यायाधीशों की आंखों में भी प्रशंसा के भाव थे”

मामा मारीच:  (मुस्कुराते हुए)  नहीं नहीं आपको कोई बेईमान नहीं कह सकता वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि आपको अवसर नहीं मिले हैं या फिर आप परखे हुए ईमानदार नहीं है। फिर भी  क्या आपने कभी बिजली चोरी नहीं की है?

मुंशी तोताराम: नहीं 

मामा मारीच:  क्या आपने अपने घर के सदस्यों की संख्या बढ़ाकर राशन की दुकान से ज्यादा राशन नहीं लिया है?

मुंशी तोताराम: नहीं। बल्कि हमको तो कभी भी पूरा राशन नहीं मिला। सड़ा हुआ गेहूं, बाजरे में कंकर और शक्कर के साथ चींटी  हमको तोल के साथ मिलती थी और उसमें भी हमको दुकानदार के अपशब्द सहने पड़ते थे या फिर सुनने पड़ते थे।

मामा मारीच: क्या आपने पानी के बिल का भुगतान हमेशा किया?

मुंशी तोताराम;  आपको शायद पता नहीं है हमारे लिए पानी फ्री था, बोले तो निशुल्क। लेकिन पानी की कहानी भी बड़ी अजीब है जिस में भी मिला दो उसके रंग जैसा हो जाता है, इसलिए हमने कभी बिना मिला हुआ पानी तो कभी देखा ही नहीं। पता नहीं गटर की गंदगी पानी में मिलकर आती थी या उस गंदगी में मिलाकर पानी दिया जाता था।

“मामा मारीच कुछ देर के लिए खामोश हो गए थे ऐसा लग रहा था कि उनके पास कोई शब्द नहीं है और ऐसा इस मुकदमे में पहली बार हुआ था जब वह निरुत्तर थे। उनको पहली बार महसूस हो रहा था कि आम आदमी को अगर बोलने का मौका दिया जाए तो एक राजनीतिज्ञ के लिए उसका सामना करना कितना मुश्किल होता है।फिर भी मामा मारीच तो मामा मारीच थे उन्होंने फिर से प्रश्न पूछना शुरु किए”

मामा मारीच: मुंशी तोताराम जी मुझे आप यह बताइए कि क्या आप घर की सफाई रखते हैं ?

मुंशी तोताराम;  अवश्य । हम कितने भी गरीब हैं  परन्तु सफाई जरूर रखते हैं क्योंकि स्वच्छता में ही देवता का निवास होता है।वो बात अलग है कि वह देवता हमारे यहां कभी कभी ही आते हैं।

मामा मारीच:  आप सफाई करके घर का कचरा कहां डालते हैं?

मुंशी तोताराम;  सड़क पर। लेकिन आप ये नहीं बोलना कि हम सड़क गंदी करते हैं क्योंकि हमारे यहां सफाई कर्मचारी हफ्तों तक नहीं आते है और कूड़ेदान जिनके नाम पर काफी सरकारी निधि आवंटित हुई है वो हमको कभी मिले ही नहीं।

“मामा मारीच के पास ऐसा लग रहा था की प्रश्न नहीं बचे क्योंकि उन्होंने कभी अपने आप को आम आदमी से जिरह के लिए तैयार ही नहीं किया था बाकी सबसे जिरह बड़ी आसान थी।सबको लग रहा था कि आज शायद मामा मारीच फंस गए हैं और यह मुकदमा शायद आज समाप्त हो जाए” फिर भी प्रश्न किया।

मामा मारीच:  तो आप एक व्यवसायिक मतदाता है?

मुंशी तोताराम;  हां।

मामा मारीच: मतलब आप पैसा लेकर अपने मत का प्रयोग करते हैं?

मुंशी तोताराम;  हां ।

मामा मारीच : तो क्या आप सभी से पैसा लेते हैं ?

मुंशी तोताराम; नहीं।

मामा मारीच; क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपने किसी ईमानदार (मुस्कुराते हुए) उम्मीदवार से पैसे और मदिरा ली हो लेकिन आपने उसको मत नहीं दिया हो?

मुंशी तोताराम;  (हंसते हुए) ईमानदार आदमी या कहें ईमानदार उम्मीदवार चुनाव जीतने के लिए पैसा क्यों देगा?

मामा मारीच:(मुस्कुराते हुए) क्या ऐसा कभी हुआ है कि आपने एक उम्मीदवार से पैसे लिए हुए हो और दूसरे उम्मीदवार को मत दिया हो?

मुंशी तोताराम;(सकपकाते हुए) मैं समझा नहीं?

मामा मारीच:  मुंशी तोताराम जी मेरा प्रश्न बड़ा आसान है। क्या आपने कभी एक उम्मीदवार से पैसे लिए हो और दूसरे उम्मीदवार को मत दिया हो?

मुंशी तोताराम; आप ये प्रश्न नहीं पूछ सकते हैं क्योंकि स्वप्नलोक के संविधान ने मुझे मत को गोपनीय रखने का अधिकार दिया हुआ है।

मामा मारीच:  मैं आपके अधिकार का सम्मान करता हूं लेकिन यह प्रश्न किसी की जिंदगी और सम्मान से जुड़ा हुआ है इसलिए आपको इसका जवाब देना पड़ेगा।

मुंशी तोताराम चुप रहे।

मामा मारीच: (न्यायालय को संबोधित करते हुए) जनाब मुंशी तोताराम से इस प्रश्न का का जवाब दिलवाया जाए अन्यथा उनकी गवाही को निरस्त किया जाए।

 न्यायाधीश दक्ष प्रजापति: (मुंशी तोताराम को संबोधित करते हुए) तोताराम जी आपको इस प्रश्न का जवाब देना पड़ेगा क्योंकि मामा मारीच को सजा दिलवाने के लिए ईमानदार व्यक्ति की गवाही जरूरी है और अभी तक आप ईमानदार साबित हुए हैं इतने ईमानदार कि आपने अपने आप को व्यवसायिक मतदाता भी कहा है। पैसे लेकर मत डालना एक नैतिक अपराध हो सकता है लेकिन कानूनी अपराध नहीं है। आप इस प्रश्न का जवाब दीजिए और अपने लक्ष्य को पूर्ण कीजिए।

मुंशी तोताराम; (नजर झुकाते हुए) एक दो बार ऐसा हुआ है जब मेंने उस उम्मीदवार को मत नहीं दिए हैं जिस उम्मीदवार ने मुझे पैसे और शराब दिए क्योंकि उस उम्मीदवार का ना केवल चरित्र खराब था, बल्कि देश के दुश्मनों के साथ भी उठना बैठना था। और मैंने काफी चाहा कि में ईमानदार रहूँ लेकिन मेरे मन ने गवारा नहीं किया और मैंने उसको मत नहीं दिया।

मुंशी तोताराम की बात सुनकर उपस्थित सभी लोग दंग रह गए और फिर अचानक हजारों की भीड़ ने खड़े होकर ताली बजाना शुरू कर दिया और उनका अभिवादन करने लगे। किसी भी व्यक्ति ने इस प्रश्न के ऐसे जवाब की कल्पना नहीं की थी। यहां तक की मामा मारीच ने भी ताली बजाकर और हाथ जोड़कर मुंशी तोताराम का अभिवादन किया और कहा मुंशी तोताराम जी में ह्रदय से आपका सम्मान करता हूं। मूलभूत संसाधनों से भी वंचित होते हुए आपने उस उम्मीदवार को मत नहीं दिया जिसकी देश के प्रति निष्ठा संदेहास्पद थी। यहां तक कि उसके लिए आपने अपने व्यवसाय के साथ बेईमानी की। मुझे आपको स्वप्नलोक का नागरिक कहते हुए गर्व महसूस होता है ।और मेरे हाथ में होता तो मैं अगले राष्ट्रीय दिवस पर आपसे ध्वजारोहण करवाता!

फिर उन्होंने न्यायालय को संबोधित करते हुए कहा:

 श्रीमान बेईमानी, बेईमानी है चाहे वह कैसी भी हो और इस मुकद्दमे में मुंशी तोताराम अपनी ईमानदारी सिद्ध नहीं कर सके इसलिए इनकी गवाही को उचित नहीं ठहराया जा सकता है। लेकिन यह मेरी प्रार्थना है कि यहां पर उपस्थित सभी लोग मुंशी तोताराम का खड़े होकर अभिवादन करें।

न्यायमूर्ति धर्मराज: मुंशी तोताराम जी आपकी गवाही को इस मुकद्दमे के लिए उचित नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन मैं मामा मारीच की बात से सहमत हूं, आप एक बहुत बेहतर इंसान हैं। देश को आप पर गर्व है और यह कहते हुए उन्होंने अपने सह न्यायाधीश दक्ष प्रजापति की ओर देखा। दोनों न्यायाधीश उनके सम्मान में खड़े हो गए और साथ में ही मुकद्दमे को देखने आए लोगों की भीड़ भी खड़े होकर तालियों से मुंशी तोताराम का अभिवादन करने लगी । मुंशी तोताराम ने हाथ  जोड़कर न्यायालय और सबका अभिवादन स्वीकार किया और माननीय न्यायालय से कुछ बोलने की अनुमति चाही,अनुमति मिलने पर कहा:

“महोदय हमारा देश हर क्षेत्र में बहुत ही उन्नत था लेकिन कुत्सित और फ्री की राजनीति हमारे देश में कामचोरी को बढ़ावा दे रही है जो किसी भी महान  देश के भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं है । कृपया करके ऐसा कानून बनाइये जहाँ सबको मूलभूत ढांचा और समान अवसर उपलब्ध कराये जाए । कोई भी सुविधा फ्री या बिना शुल्क के ना दी जाये”

न्यायमूर्ति दक्ष: एक नागरिक के तौर पर हम आपकी बात से सहमत हैं और आशा करते है की आपकी ये कामनाये पूर्ण होंगी।

इसके साथ ही न्यायालय ने मुकद्दमे की कार्रवाई कल तक के लिए स्थगित कर दी।

आज के मुकद्दमे की सबसे बड़ी बात यह थी की पहली बार कोई गवाह अपना सर ऊंचा करके जा रहा था।

अगले अंक में जारी…

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