व्यंग्य – इश्तहार-ए-इश्क

मशहूर शायर जनाब निदा फाजली साहब का एक शेर है-“कोशिश भी कर, उम्मीद भी रख, रास्ता भी चुन,फिर इसके बाद थोड़ा मुकद्दर तलाश कर”।मगर विज्ञापनों की दुनिया में तो हर काम तुरत-फुरत होना चाहिये। 1- मसलन अगर आप टू जी, थ्री जी और कॉमनवेल्थ खेल घोटालों से दुखी और परेशान हैं। आप चाह कर भी … Continue reading व्यंग्य – इश्तहार-ए-इश्क