हिंदी प्रतियोगिता

लक्ष्मी

गाँव में खबर फैली थी कि सरकार हर घर में खुड्डा/शौंचघर बनाने की  नई योजना लेकर आई है, जिसके लिए हर एक परिवार को बारह हजार रुपए मिलेंगे और वो रुपये गांव के प्रधान जी अपने हस्ताक्षर से परिवार के मुखिया को देंगे

जब यह बात लक्ष्मी ने सुनी तो उसे भी अच्छा लगा क्योकि वह खेत में शौंच के लिए जाने से बहुत परेशान हो चुकी थी एक तो खेत घर से बहुत दूर था सो देर रात- विरात जाना खतरनाक था, अँधेरे में सांप-सपूरा या जंगली जानवर का डर बना रहता था, दूसरी तरफ दिन के उजाले में खेत में शौंच के लिए बैठने में शर्म आती थी क्योंकि गाँव के मर्द खेतों में काम किया करते थे और राहगीर भी इधरउधर जाया करते थे। इन सबके साथ ही आंगनबाड़ी बाली बहनजी ने बताया था कि खुले में शौंच करने से बहुत सारी खतरनाक बीमारियां फैलती है जैसे हैजा, डायरिया, टायफाइड इत्यादि।

लक्ष्मी अपने घर के द्वार पर बैठे-बैठे यही सब सोच रही थी

लक्ष्मी एक विधवा, खूबसूरत एवं जवान औरत थी। अभी उसकी शादी को मात्र पाँच साल ही हुए थे। लक्ष्मी का पति सरकारी कम्पनी में होमगार्ड की नौकरी करता था। एक रात कम्पनी में कुछ चोर  घुस आए थे उनको रोकते समय गोली लगने से उसकी जान चली गयी थी यह लक्ष्मी और उसके पति के लिए पहला दुर्भाग्य था किंतु दूसरा दुर्भाग्य  केवल लक्ष्मी के लिए ही था अर्थात लक्ष्मी के पति के मरने से एक साल पहले ही सरकार ने कंपनी को निजी व्यापारी के हाथों बेच दिया था अतः लक्ष्मी को अपने पति की मृत्यु का थोड़ा बहुत हर्जाना ही मिला सरकारी कर्मचारी के हिसाब से हर्जाना नही मिला और ना ही अनुकंपा नौकरी मिली, जो मिला वह समय और मंहगाई के हिसाब से और उसके पति के बलिदान के हिसाब से ना कुछ ही था। लक्ष्मी  के एक  दो साल का बेटा ध्रुव भी था, जो शादी के दो साल बाद हुआ था यही लक्ष्मी के जीवन का आखिरी सहारा था जिसकी आश पर लक्ष्मी पहाड़ जैसे जीवन को कुर्बान करने के लिए तैयार थी .”

तभी सावित्री आयी और लक्ष्मी के उदास चेहरे को देखकर बोली, “बहन लक्ष्मी द्वार पर बैठे बैठे  दीवार में एक टक आँख गड़ाए क्या सोच रही है? बहन दीवार में कोई खजाना दिख रहा है तो मुझे भी बता देइसप्रकार सावित्री ने माहौल को सामान्य और खुशनुमा कर दिया।

सावित्री की बात सुन क्ष्मी मुस्कुराई और बोली, “कुछ नही सोच रही बीबी आपको पता है आज शुबह रजुआ का छोरा बता रहा था कि सरकार हर घर में खुड्डा बनबा रही है

सावित्री बोली, हाँ मुझे भी रात को रोहित के पापा बता रहे थे कि प्रधान बारह हजार का चैक देगा हर घर में शौचालय बनबाने के लिए।

लक्ष्मी बोली, बीबी सरकार यह तो बहुत बढ़िया काम कर रही है .

सावित्री, हाँ लक्ष्मी ये बात सही कह रही है अब से हम भी शहरी लोगन की तरह घर के आंगन में ही निभट/शौंच कर लिया करेंगे जिससे घर में हर बखत भिस्टा की खुशबू भरी रहेगी.” सावित्री का व्यंग सुन खुद सावित्री के साथ साथ लक्ष्मी भी जोर से हंसने लगी।

सावित्री हंसी रोकते हुए बोली, “ए दारी जोर से मत हंस बगल का काका सुनेगा तो हमको बेसहूर कहेगा..”

लक्ष्मी सावित्री के व्यंग का जबाब देते हुए बोली, “वो सब बात तो है जीजी पर सुविधा भी बहुत है ,रात विरात खेत में जाने में बहुत डर लगता है, और बच्चो को तो दिन में चारपांच बार लेकर भागो बरना घर का द्वार और नाली सारा दिन गन्दी कराओ।

सावित्री बोली, “हाँ लक्ष्मी ये बात तो सही है बहन, किंतु मुझे तो जंगली जानवरों से ज्यादा मर्द जानवरों से डर लगता है बहिन रात में किसी ने धर पकड़ ली तो किसी को मुँह दिखावे के लायक नही रहेंगे और ऊपर से खसम और सास-ससुर भी ऐसा नही है कि फिर हमको घर में रख लें

लक्ष्मी सावित्री की बात में हाँ मिलाते हुए बोली, “सही बात है बीबी, जो मुच्छड़ है उससे तो मुझे दिन में ही डर लगता है रात की बात तो छोड़ ही दो और नये नये छोरा तो मेरी तरफ ऐसे घूरते है जैसे मैं उनके सामने बिना कपड़ों के खड़ी हूँ। विधबा को तो बीबी बूढ़ेजवानछोरा सब सड़क पर गिरी रस मलाई समझते है.”।

यह कहती हुई लक्ष्मी आंखों में आँसूं भरकर के रोने लगी

सावित्री लक्ष्मी को चुप करते हुए बोली, नही बहन, विधवा ही नही सधवा को भी मर्द पैरों की धूल समझते हैऔर अब रोरो कर जी छोटा करने क्या बनता है जब ऊपर बाले ने ऐसा किया है तो वो ही अच्छा करेगा, तू वस उस पर विस्वास रख। तू अपने बेटा ध्रुव के जीवन की ओर देख और उसी की आश कर जब वो बड़ा हो जाएगा तो सब सम्भाल लेगा। तेरे साथ तो बहन विपत्ति है हमको देख हमारे तो सब कुछ है फिर भी जब खेत में शौंच करने जाते है तो गाँव के मर्द ऐसे देखते है कि हम उनकी  लुगाई है सो रो मत बहन..मर्द तो बगैर नाथ के सांड होते है..”

लक्ष्मी अपने आँसू अपनी हरी साड़ी के पल्लू से पौंछते हुए बोली, “हाँ बीबी अब मैं ध्रुव के लिए ही जीवित हूँ वरना हमारे माँ-बाप तो अब तक हमारी दूसरी शादी करा देते.”

सावित्री के आँसू देख बगल से निकती हुई पुष्पा भी रुक गयी और बोली, “लक्ष्मी बहिन कब तक अपना दिल दुखी करेगी, अब जो होना था सो हो गया, मैं तो कहती हूँ इस रोज-रोज की परेशानी से बढ़िया है कि तू दूसरी शादी करा ले क्योकि अभी तेरी उमर ही क्या है ?

लक्ष्मी , नही पुष्पा बीबी जब मेरे भाग्य में ऐसा ही लिखा है तो ऐसा ही सही,क्या पता दूसरे से ब्याह किया और वो भी मर गया तो अब आप ही बताओ मैं अपने स्वार्थ में दूसरी माँ के लाल की क्यों लि चढ़ाऊं.”

सावित्री बोली, ऐसे नही बोलते लक्ष्मी, ये तो भाग है किसी ने “गुड़ की तरह भोड़ नही चखा” सो बोल दें कि तेरे भाग खट्टे और मेरे भाग मीठे  चल जो कुछ है पर कल प्रधान से बात कर खुड्डा तो बनबा ही लेते है। और तेरा काम तो वैसे भी घर बैठे तेरा धरेला खसम “राजन” कर ही देगा।

इसप्रकार सावित्री ने लक्ष्मी को सांत्वना भी दी तो साथ ही व्यंग भी कर दिया।

तभी बगल के घर से ध्रुव खेल कर आ गया और लक्ष्मी से बोला, मम्मी मुझे पॉटी करनी है

ध्रुव की बात सुनकर तीनो हँसने लगी और पुष्पा बोली  “ हाट लगी नही है और घटघटा पहले ही आ गए”

गली की पंचायत स्थगित करके सावित्री और पुष्पा अपने अपने घर चली गयी और लक्ष्मी ध्रुव को खेत में शौंच कराने ले गयी

दूसरे दिन सुबह ही सुबह राजन आ गया और लक्ष्मी के द्वार पर खड़े होकर उसे पुकारने लगा-“भाभी भाभी, अरे लक्ष्मी भाभी कहाँ पर हो.?

“राजन अभी सत्रह-अट्ठारह साल का युवक था वह लक्ष्मी का दूर के रिस्ते में देवर लगता था और उसका घर लक्ष्मी के घर के पास  ही था शरीर से लम्बादुबला एकदम मरियल सा पर व्यवहार से अच्छा था

गाँव के लड़के लक्ष्मी का नाम उससे जोड़कर अक्सर उसकी माजक बनाया करते थे वैसे तो उसके मन में लक्ष्मी को लेकर कुछ भी नही था परंतु लक्ष्मी जैसी खूबसूरत महिला के साथ नाम जुड़ने पर वह भी अंदर से आनंदित जरूर होता था लक्ष्मी भी ध्रुव के पापा के गुजर जाने के बाद एकदम अकेली पढ़ गयी थी घर का सामान लाने के लिए उसे बाजार जाना पड़ता था किन्तु जब से उसकी राजन से बात होना शुरू हुई है तब से उसके बाजार के चक्कर कम हो गए हैं। लक्ष्मी भी अवसरवादियों की तरह उसे जानबूझकर थोड़ा-बहुत छेड़ दिया करती थी जिससे वो भी उससे दूर ना जाय और उसका काम बना रहे.”

राजन की पुकार सुन, लक्ष्मी घर से बाहर निकली और व्यंगात्मक स्वर में बोली, हाँ बूढ़े बाबा क्या बात हो गयी काहे सुबह सुबह इतनी जोर से भाभी-भाभी चिल्ला रहे हो ब्याह हो जाये तो ऐसे मत चिल्लाना नही तो लुगाई छोड़कर भाग जाएगी

राजन सरमाते हुए बोला, भागे गी तो भाग जाय हम तो ऐसे ही चिल्लाएंगे

तभी राजन के बगल से दूध वाला जाते हुए धीरे से बोला, हाँ भैया राजन जब भाभी ही हेरोइन टाइप की हो तो फिर बीबी भागे तो भाग जाय, का फरक पड़ता है।

राजन ने , खीझते हुए बोला, चुप रह दूधिया।

दूध वाला, हम तो चुप होकर ही सब देख और सुन रहे हैं,पर मौके पर हिसाब हमारा भी रखनाराजन भैया।

दूध वाला राजन की खीझ पर हंसते हुए चला गया

राजन अपनी बात पर लौटा और बोला , हां भाभी मैं कह रहा था कि आज मैं ग्राम प्रधान समुन्दर सिंह के पास जाऊंगा, सरकार की जो योजना आयी है खुड्डा बनाने वाली उसका चैक लेने। अगर तुम भी मुझे अपना राशन कार्ड और मनरेगा  कार्ड दे दो तो तुम्हारे खुड्डा की भी बात कर लूंगा

लक्ष्मी हंसते हुए, हाँ-हाँ राजन भैया ठहरो अभी लाती हूँ

लक्ष्मी कार्ड लेने घर के अंदर जाती है तब तक राजन ध्रुव, जो अभी सो कर उठा था, को धीमे स्वर में छेड़ता है – क्यों रे रात को मम्मी ने दूध पिलाया था?

ध्रुव अपनी तोतली भाषा मे, नही पिया ता, अब मैं बरा हूँ, बहुत बरा, मम्मी का दूध नही पिता। इसप्रकार ध्रुव ने भी उत्तर और कारण दोनों दार्शनिक अंदाज में दे दिए।

तभी लक्ष्मी घर के अंदर से आयी और आधार कार्ड,राशनकार्ड,मनरेगा कार्ड सब एक थैली में डालकर राजन को पकड़ा दिया और बोली, भैया लगे हाथ प्रधान जी से विधवा पेंशन की भी पूछ लेना

राजन खीझते हुए बोला, भाभी तुम तो सारे काम आज ही करबा लो खिलाती पिलाती कुछ है नही, भैया भैया कर सब काम करवा लेती हो

लक्ष्मी हंसते हुए  बोली, भैया नही कहूँ तो क्या खसम कहूँ.? और काम करके आ जाओ गर्मी में नीबू पानी पिलाऊंगी

राजन बोला, हाँ घर के पीछे लगे पेड़ से नींबू तोड़ लोगी कौन सा मोल लेकर आओगी.?

लक्ष्मी बोली, अच्छा लोग, तुम्हारे लिए नींबू विलायत से लेकर आउ तभी पिओगे..” यह कहकर लक्ष्मी हँसने लगई।

गांवों में परम्परागत रूप से देवर-भाभी में होने बाली माजक की तरह ये भी हल्कीफुल्की छेड़खानी ही थी, जिसमे राजन और लक्ष्मी दोनों को बिना अर्थ के रस मिलता था और कभी कभी ध्रुव भी इस हँसोडपने में उन दोनों का साथ दे देता था गाँव के समाज की इसी एकरंगी बुनाबट के सहारे विधबा लक्ष्मी अपने प्रत्येक दिन को ऐसे ही संतुलित करके गुजार रही थी..”

राजन दोपहर से पहले ही प्रधान समुन्दर सिंह के घर पहुँच गया और वहां देखा कि आ-पास के सभी गाँव बालों का जमघट लगा हुआ था।

यह देखकर राजन स्वयं से बोला, भाई आज तो लेट हो गया मुश्किल ही नम्बर नही आएगा..?

तभी उसे प्रधान जी का कार ड्राइवर ‘भोला’ दिखा जो लाइन में लगे लोगों से कुछ रिस्वत लेकर उनको आस्वासन दे रहा था कि वह उनको बारह हजार का चैक जल्दी दिलबा देगा

राजन ने भोला को पुकारा, भोला भोला ..

भोला ने उसे देखा और मुस्कुराते हुए बोला, हाँ भाई लक्ष्मी भाभी के रसिया तू भी लाइन में लगा हुआ है

यह सुनकर राजन मुस्कुराय और बोला, भोला यार मेरा काम जल्दी करबा  दे, नही एसे तो महीने तक नम्बर नही आएगा

भोला, राजन नम्बर तो मैं तेरा आज और अभी लगवा दूँगा और वो भी पूरा पक्का पर मुझे क्या फायदा होगा?

राजन, भाई तू प्रधान जी का ड्राइवर है, मैं तुझे क्या दे सकता हूँ और तू मेरे ही गाँव का भाई बंधू है

भोला, राजन खेल मत खेल यार सीधी सीधी बात कर

राजन, तू भी तो सीधा सीधा बोल तुझे क्या चाहिए? मैं वही दूँगा पर एक नही दो खुड्डा की व्यवस्था करनी है

भोला, चौकते हुए दो खुड्डा की क्यों?

राजन बोला एक मेरा दूसरा लक्ष्मी भाभी का

भोला ताली देकर हंसते हुए बोला, भाई तूने सही सफेद बतक दबा रखी है, तू उसे ही साथ ले आता तो अभी और इसी वक्त प्रधान जी तेरा और उसका काम खड़े खड़े कर देते

राजन, माजक नही भोला सीधी बात कर

भोला, दे राजन सरकार हर घर में एक खुड्डा बनाने के लिए बारह हजार रूपये का चैक दे रही है उसमें से तीन हजार रूपये नगद प्रधान जी को पहले देने पड़ेंगे तब जाकर प्रधान जी बारह हजार का चैक हाथ में देंगे अगर राजी है तो अभी चल नही तो अपने घर जा और लक्ष्मी भाभी के गोरेगोरे हाथों से खोपड़ी में चम्पी करा

राजन, भोला यार ये तो गलत बात है,सरकार पूरा पैसा दे रही है और प्रधान जी वस नौ हजार दे रहे हैं!

भोला, भाई राजन प्रधान जी ने चुनाव जीतने में लाखों करोड़ों रूपये खर्च किए हैं, दारु,मिठाई और साड़ी घर घर भंडारे की तरह बांटी है ,अब वो पैसा तो बसूलना पड़ेगा कि नही? बरना प्रधान जी तो घाटे में चले जाएंगे और फायदा नही होगा तो कौन लाखों खर्च करके प्रधान बनेगा? और मेरे भाई ये कहानी सब को पता है बीडीओ से लेकर डी.एम तक और सीएम से लेकर पीएम तक हम तो कल ही लोटे है राजधानी में चंदा चढ़ाकर समझा।

राजन, अच्छा यार भोला, मतलब देना ही पड़ेगा

भोला, सौ प्रतिशत

अच्छा अगर लक्ष्मी भाभी आ जाएं तो?

भोला, तब और बात होगी

राजन गाँव वापस जाता है और लक्ष्मी को पूरी घटना सुनाता है और कहता है, भाभी आप चलो तो प्रधान जी पुरे बारह हजार रूपये भी दे देंगे और काम भी जल्दी हो जाएगा

राजन की बात सुनकर लक्ष्मी, प्रेसर कुकर में भरी गैस की तरह राजन के ऊपर फट पड़ी किन्तु सधे और सामान्य स्वर में क्योकि वह समझती थी कि तेज़ बोला तो समाज कुछ को कुछ और ही समझ बैठेगा और वह राजन की पुरुष ईगो को भी चोट नही पहुँचाना चाहती थी

अतः लक्ष्मी बोली राजन भैया, ये एक दिन की बात नही है, मुझे पूरी जिंदगी इस गांव में और इन्ही लोगों के बीच काटनी है एक वार सियार के मुँह मांस लग गया तो यही बात हर बार होगी और मैं गाँव की नगर वधु बन जाऊंगी। अब वो समाज नही रहा जो कुछ लिए बिना ही किसी का भला कर दे। आजकल भला भी भला होने पर ही किया जाता है। आज मेरे हाथ में पूरा चैक देगा तो कल उसी का लाभ लेगा। इसलिए प्रधान जी से बोल दो जो काटने है काटे और जो देने है दे

लक्ष्मी आगे बोली, “ राजन मैं भी दूसरी शादी कर सकती हूँ और मुझे भी कोई अच्छा घर परिवार मिल जाएगा और ध्रुव को भी कोई दूसरा पिता, इस दुनिया में किसी भी चीज की कोई कमी नही है, “जहाँ चाह वहाँ राह है” परन्तु मैं किसी मर्द की गुड़िया बनकर नही रहना चाहती मर्दऔरत के जीवन मिलन का जो मूलभूत उद्देश्य है वह मैंने ध्रुव को जन्म देकर पूरा कर दिया है और अगर वो भी जिन्दा होते तो भी हम क्या करते? वस यही कि ध्रुव की अच्छी परवरिश करते और उसे एक अच्छा नागरिक बनाते, अब वो नही है तो यह काम मैं अकेली पूरा करूंगी, हाँ बहुत कठिनाइयां है और पुरुषप्रधान समाज में विधवा स्त्री के लिए यह और भी मुश्किल है फिर भी में किसी के बिस्तर पर सोने के बजाय या किसी जिंदा पुरुष का चिन्ह अपनी माँग में ढोने के बजाय अपनी मेहनत से अपनी पहचान से ध्रुव के लिए सब कुछ करूंगी जो ध्रुव के पिता करते । क्या एक औरत इस समाज में बगैर पुरुष आलम्ब के नही रह सकती..? जब एक पुरुष को अपनी इक्षा से अपना जीवन चुनने का अधिकार है तो यह महिला को क्यों नही..?

राजन बोला, भाभी जब आप इतना ही साहस रखती हो तो प्रधान जी से क्यों नही कहती कि वो सरकार द्वारा दिए रुपयों में से केवल नौ हजार रुपया ही क्यों दे रहे हैं..?

लक्ष्मीहाँ राजन तुम सही कह रहे हो किन्तु अभी मैं उस लायक नही हूँ। और प्रधान जी जो कर रहे हैं वो किसी लिंग,जाति या धर्म भेद से प्रेरित होकर नही है बल्कि यह एक सामूहिक शोषण है, जिसके लिए केवल एक व्यक्ति को नही बल्कि सभी को एक साथ बोलना होगा और उस लालच को त्यागना होगा जिस आधार पर प्रधान जी हमसे वोट मांगते हैं। अभी मैं इस समाज के लिए एक बेचारा और खूँटा विहीन गाय हूँ जिसे हर कोई दुहना चाहता है किंतु मैं दंत विहीन नागिन नही जिसे कोई भी सपेरा अपने बीन पर नचा सके..।

राजन, लक्ष्मी की ये बात सुनकर सन्न रह गया और मन ही मन सोचने लगा कि भाभी तो चोट खाई नागिन की तरह है जो धीरे धीरे अपने रूप में आ रही है किन्तु लक्ष्मी के मन की बातों को सुनकर उसके दिल में लक्ष्मी के लिए और भी इज्जत बढ़ गयी।

“ वास्तव में एक महिला को परंपरागत पुरुष प्रधान समाज में अपना वजूद स्थापित करने के लिए उसी समाज को चुनौती देने भी जरूरी है क्योकि समाज के बदलाब के लिए यह सकारात्मक और प्रगतिशील है.”

लक्ष्मी की ये बात सुनकर, राजन मुस्कुराता हुआ गम्भीर मनोभाव से घर से निकल गया और बोला , “अब भाभी जो भी हो हम खुड्डा बनबाके ही रहेंगे.”।

अभी राजन की उमर ही गरम खून वाली थी इसलिए लक्ष्मी की गर्मजोशी वाली बातें सुनकर वह भी जोश से लबालब हो गया

किन्तु तीन महीने के लंबे प्रयास के बाद जब राजन प्रधान जी के पास चैक लेने पहुँचा तब तक उसका का पूरा जोश लाइन में लगकर पसीना बनकर बह चुका था।  और जब प्रधान जी ने उसे नौ हजार के दो चैक आँखों में आँखे डाल कर उसके हाथ में पकड़ाये तो राजन भी प्रधान जी की लाललाल बड़ी आँखे देख डर से सकपका गया थातभी प्रधान जी ने गरजते हुए बोला राजन, “तेरी लक्ष्मी भाभी का चैक लेने वाला स्वीकृति पत्र कहाँ है..? बिना उसके तुझे चैक नही मिलेगा, इसके लिए लक्ष्मी को ही आना पड़ेगा

प्रधान जी की कड़कड़ाती आवाज़ सुन राजन हड़बड़ा हट के साथ अपना थैला कुरेदने लगा और गुडम मुडम हुआ तेल हल्दी खाया लक्ष्मी का स्वीकृति पत्र उसने निकाल कर सीधा कर प्रधान जी के आगे बढ़ा दिया।

प्रधान जी ने वेमन से पत्र लेते हुए जैसे ही उसे देखा प्रधान जी की बड़ी बड़ी आँखे और भी बड़ी हो गयी और एकटक उस स्वीकृति पत्र को देखती रही। यह पत्र अंग्रेजी भाषा में और बहुत ही सुंदर लिखावट में लिखा हुआ थाप्रधान जी ने घर के अंदर से अपने अठारह साल के पुत्र को बुलाया जिसने उसे पढ़ा तब जाकर प्रधान जी ने करेले जैसा मुँह बनाकर राजन को नौनौ हजार के दो चैक दिए।

राजन ने दोनों चैक सम्भाले और गाँव की तरफ हवा की तरह लहराता हुआ साइकिल से निकल पड़ा।

गाँव आते ही राजन पहले लक्ष्मी के घर पहुंचा और हंसते हुए विजयी भाव से लक्ष्मी का चैक थैले से निकाला और उसको पकड़ाया और उसी समय लक्ष्मी भाभी ने भी राजन का शुक्रिया करते हुए उसके दूसरे हाथ में ठंडा ठंडा नीबू पानी पकड़ा दिया और फिर दोनों ने  एकदूसरे की तरफ एक संतुष्ट और विजयी भाव से देखा और ध्रुव के साथ तीनो विजयी हंसी हंसने लगे…..

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